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CG Dharma Svatantrya Vidheyak 2026: धर्मांतरण कानून के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचा मसीही समाज, याचिका दायर

छत्तीसगढ़ की राजनीति और सामाजिक गलियारों में ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ को लेकर चल रहा घमासान अब कानूनी लड़ाई में तब्दील हो गया है। 19 मार्च को जब से यह विधेयक सामने आया है और राजधानी रायपुर के जयस्तंभ चौक सहित कई जगहों पर इसका विरोध हुआ है, तब से ही इस पर विवाद जारी है। अब मसीही समाज ने इस नए और कड़े धर्मांतरण कानून के खिलाफ सीधे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

आजीवन कारावास और कड़े प्रावधानों को दी गई चुनौती

मसीही समाज के प्रतिनिधि क्रिस्टोफर पॉल ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें कानून के कई प्रावधानों को असंवैधानिक बताते हुए उन्हें निरस्त करने की मांग की गई है।

  • दरअसल, राज्य सरकार के इस नए कानून में जबरन, प्रलोभन या धोखाधड़ी से धर्मांतरण कराने पर बेहद कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।
  • नए नियमों के अनुसार, अवैध धर्मांतरण साबित होने पर 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।
  • इसके अलावा, आर्थिक प्रलोभन, दबाव या छल से धर्म बदलवाने को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है, और बड़े स्तर पर धर्मांतरण कराने पर और भी सख्त दंड देने का उल्लेख किया गया है।

अनुच्छेद 25 और निजता के अधिकार का हवाला

याचिकाकर्ता क्रिस्टोफर पॉल ने अपनी याचिका में संविधान के बुनियादी अधिकारों का हवाला दिया है।

  • उनका मुख्य तर्क यह है कि यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत नागरिकों को मिले ‘धर्म की स्वतंत्रता’ के अधिकार का सीधा उल्लंघन करता है।
  • याचिका में यह भी कहा गया है कि अवैध धर्मांतरण के नाम पर आजीवन कारावास जैसी सजा देना पूरी तरह से असंवैधानिक है।
  • वहीं, मसीही समाज ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि कानून की परिभाषाएं और शब्दावली बहुत अस्पष्ट हैं, जिससे पुलिस और प्रशासन द्वारा मनमानी कार्रवाई की आशंका बढ़ गई है। यह कानून व्यक्ति की निजता (Right to Privacy) और उसकी आस्था के अधिकार में सीधा हस्तक्षेप करता है।

दुरुपयोग की आशंका और प्रदेश की जनसांख्यिकी

हालांकि, राज्य सरकार लगातार यह कह रही है कि यह कानून धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए नहीं, बल्कि गैर-कानूनी और छल-कपट वाले तरीकों पर नियंत्रण पाने के लिए लाया गया है।

  • मसीही समाज का आरोप है कि राज्य सरकार इस अधिनियम को टारगेट कर एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकती है और इसका दुरुपयोग अल्पसंख्यक समुदायों के उत्पीड़न के लिए हो सकता है।
  • जनसांख्यिकी की बात करें, तो 3 करोड़ 30 लाख की आबादी वाले छत्तीसगढ़ में 4,90,542 से अधिक ईसाई समुदाय के लोग रहते हैं।
  • प्रदेश में 900 से अधिक छोटे-बड़े चर्च हैं, जिनमें 1868 में बना विश्रामपुर का पहला चर्च और 1979 में जशपुर के कुनकुरी में स्थापित एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रोमन कैथोलिक कैथेड्रल शामिल है।

फिलहाल हाईकोर्ट में याचिका लग चुकी है, लेकिन सुनवाई के लिए अभी कोई तारीख तय नहीं की गई है। सबकी निगाहें अब अदालत के अगले कदम पर टिकी हैं।

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