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Vedanta Power Plant Blast: 20 मौतों के बाद एक्शन में पुलिस, चेयरमैन अनिल अग्रवाल और प्रबंधन पर FIR दर्ज

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भयानक बॉयलर विस्फोट के मामले में अब पुलिस ने बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। इस औद्योगिक महात्रासदी में 20 बेगुनाह मजदूरों की दर्दनाक मौत के बाद पूरे प्रदेश में भारी आक्रोश है। इसी दबाव और गंभीर प्रशासनिक जांच के बाद पुलिस ने वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और प्लांट के शीर्ष प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। यह मामला सीधे तौर पर आपराधिक लापरवाही और मजदूरों की जान के साथ खिलवाड़ का माना जा रहा है।

600 डिग्री सेल्सियस तापमान की भाप बनी काल

दरअसल, यह दिल दहला देने वाला हादसा मंगलवार दोपहर करीब 2:30 बजे हुआ था। सिंहतराई स्थित इस विशाल पावर प्लांट में सब कुछ सामान्य चल रहा था, तभी बॉयलर-01 में अचानक एक जोरदार विस्फोट हुआ।

  • इस ब्लास्ट के बाद बॉयलर से 600 डिग्री सेल्सियस तापमान वाली सुपरहीटेड स्टीम यानी खौलती हुई भाप तेजी से बाहर निकली।
  • इस अत्यधिक गर्म भाप ने वहां काम कर रहे दर्जनों मजदूरों को पलक झपकते ही अपनी चपेट में ले लिया।
  • इस दर्दनाक हादसे में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 15 अन्य श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिनका इलाज सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में चल रहा है।

चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत अधिकारियों पर केस दर्ज

इस भीषण हादसे के बाद शुरुआती जांच में प्लांट प्रबंधन की भारी लापरवाही सामने आई है। मशीनों के रखरखाव और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के स्पष्ट सुराग मिले हैं।

  • इसके अलावा, इस पूरी त्रासदी की जिम्मेदारी तय करते हुए पुलिस ने एक सख्त कदम उठाया है।
  • वेदांता ग्रुप के शीर्ष प्रमुख अनिल अग्रवाल और प्लांट के अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही का मामला दर्ज किया गया है।
  • प्रशासन का मानना है कि इतने बड़े पावर प्लांट में सुरक्षा उपकरणों की घोर कमी और बिना ऑडिट के जर्जर बॉयलर का संचालन ही इस 20 मौतों का कारण बना है।

मजदूरों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

हालांकि, इस एफआईआर के बाद भी कई गंभीर सवाल खड़े हैं। इस हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बड़े औद्योगिक घरानों में मुनाफे की होड़ के बीच गरीब मजदूरों की जान की कोई कीमत नहीं है। जान गंवाने वाले ज्यादातर मजदूर दूसरे राज्यों से आए थे। अब राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर यह दबाव है कि अनिल अग्रवाल और प्रबंधन पर दर्ज की गई यह एफआईआर सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि दोषियों को कड़ी सजा मिले और पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।

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