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“अमेरिका नहीं चाहता भारत और पाकिस्तान साथ आएं”: पूर्व CIA अधिकारी ने खोले कई गहरे राज

India Pakistan Tension:अमेरिका की सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) के पूर्व एनालिस्ट लैरी सी जॉनसन (Larry C. Johnson) ने भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में अमेरिका की भूमिका को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि अमेरिका कभी भी भारत और पाकिस्तान को साथ में नहीं देखना चाहता और इन दोनों मुल्कों के बीच युद्ध भड़काने में भी अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का हाथ रहा है।

तनाव बनाए रखना चाहता है अमेरिका

पूर्व CIA अधिकारी ने कहा, “अमेरिका हमेशा चाहता है कि दक्षिण एशिया में तनाव के हालात बने रहें। हम नहीं चाहते कि भारत और पाकिस्तान की आपस में कभी बने।” जब उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तान द्वारा भारत पर किए गए आतंकवादी हमलों को भड़काने में अमेरिका का हाथ हो सकता है? इस पर उन्होंने सहमति जताते हुए कहा कि अमेरिकी खुफिया जानकारी ने निश्चित रूप से पर्दे के पीछे से तनाव को हवा देने में मदद की है। साथ ही जॉनसन ने यह भी दावा किया कि भारत के प्रति अमेरिका का कुछ हद तक रवैया नस्लवादी रहा है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ट्रंप के दावों की पोल

इस इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों पर भी तंज कसा गया, जिनमें वे भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने का श्रेय लेते हैं।

  • ऑपरेशन सिंदूर (7 मई 2025): गौरतलब है कि 7 मई 2025 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का आगाज किया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच 4 दिनों तक भारी संघर्ष चला।
  • सीजफायर की सच्चाई: ट्रंप ने इस दौरान सीजफायर कराने का दावा किया था, लेकिन जॉनसन ने इस दावे पर हंसते हुए कहा कि अमेरिका पर्दे के पीछे से आग लगाने का काम कर रहा था। वहीं, भारत सरकार पहले ही यह साफ कर चुकी है कि यह संघर्ष विराम अमेरिका के दबाव में नहीं, बल्कि पाकिस्तान की तरफ से किए गए अनुरोध के बाद हुआ था।

भारत के पक्ष में पूर्व अमेरिकी उप विदेश मंत्री का बयान

भले ही जॉनसन ने खुफिया तंत्र की पोल खोली हो, लेकिन अमेरिकी कूटनीति में भारत का कद लगातार बढ़ा है। हाल ही में अमेरिका के पूर्व उप विदेश मंत्री कर्ट एम. कैम्पबेल ने हडसन इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में कहा था कि दक्षिण एशिया में शांति भारत-अमेरिका की करीबी से ही संभव है। उन्होंने स्पष्ट किया, “हमारे सभी रणनीतिक हित दिल्ली में हैं। भारत के साथ हमारा रिश्ता ‘बड़े अक्षरों’ (Capital Letters) में लिखा है, जबकि पाकिस्तान का तो अब एक पैराग्राफ में जिक्र तक नहीं आता।”

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