CGPSC Scam ED CBI Raid: CGPSC भर्ती घोटाले में भिलाई में CBI-ED का बड़ा छापा, जेके ध्रुव और अमृत खलको के घर दबिश

भिलाई/रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले में जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। बुधवार सुबह करीब 6:30 बजे प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की संयुक्त टीम ने भिलाई में CGPSC के पूर्व सचिव जीवन किशोर (जेके) ध्रुव के निवास पर दबिश दी। यह छापा कई घंटों तक चला, जिसमें घर में मौजूद महत्वपूर्ण दस्तावेजों, डिजिटल डिवाइस और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच की गई।
यह पूरा मामला वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित CGPSC भर्ती परीक्षाओं में हुए कथित पेपर लीक, मनी लॉन्ड्रिंग और चयन सूची में हेरफेर से जुड़ा है।
राज्यपाल के पूर्व सचिव के घर भी पहुंची ईडी
कार्रवाई के इसी क्रम में ED की एक टीम भिलाई के तालपुरी स्थित राज्यपाल के पूर्व सचिव अमृत खलको के निवास पर भी पहुंची और सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
- चयन सूची पर उठे सवाल: इस घोटाले में अमृत खलको के परिवार के सदस्यों की भूमिका संदेह के घेरे में है। CGPSC चयन सूची में उनकी बेटी नेहा का 13वीं रैंक और बेटे निखिल का 17वीं रैंक पर डिप्टी कलेक्टर पद के लिए चयन हुआ था।
- संपत्तियों की जांच: ED टीम अमृत खलको और उनके परिजनों से पूछताछ करने के साथ-साथ उनकी चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों को खंगाल रही है।
जेके ध्रुव और कोचिंग कनेक्शन
- पद का दुरुपयोग: CBI के अनुसार, तत्कालीन सचिव जेके ध्रुव पर अपने पद का दुरुपयोग कर चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने और अपने बेटे समेत अन्य करीबियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का गंभीर आरोप है।
- महासमुंद कनेक्शन: जांच में एक बड़े संगठित नेटवर्क का भी खुलासा हुआ है। महासमुंद क्षेत्र के एक रिसॉर्ट और कुछ कोचिंग संचालकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिन पर अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का आरोप है।
कई बड़े अधिकारी पहले से हैं जेल में
इस हाई-प्रोफाइल मामले में CGPSC के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक समेत कई आरोपी पहले से ही जेल में बंद हैं। जांच एजेंसियों ने अब तक कुल 29 लोगों की भूमिका को चिन्हित किया है। CBI इस मामले में 400 से 700 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है और मामला अब ट्रायल के चरण में पहुंच गया है।
अभ्यर्थियों और विपक्ष के भारी विरोध प्रदर्शन के बाद राज्य सरकार ने यह जांच CBI को सौंपी थी, जिसके बाद से लगातार बड़े खुलासे हो रहे हैं।



