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Vedanta Power Plant Blast: मरने वालों की संख्या 14 पहुंची, ज़िम्मेदार कौन?.. मुआवजे का ऐलान

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंहंतेराई इलाके में स्थित वेदांता लिमिटेड के बिजली संयंत्र में हुए भीषण हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। Vedanta Power Plant Blast (वेदांता पावर प्लांट ब्लास्ट) की इस दर्दनाक घटना में अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 तक पहुंच गई है। यह हादसा कल उस वक्त हुआ था जब प्लांट के भीतर बॉयलर की एक ट्यूब अचानक फट गई।

Vedanta Power Plant Blast: कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?

स्थानीय पुलिस और प्रशासन की शुरुआती जांच में इस भयानक विस्फोट की मुख्य वजह सामने आई है।

  • पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बॉयलर से टरबाइन को उच्च दबाव वाली भाप (High-pressure steam) की आपूर्ति करने वाली ट्यूब में एक जोरदार विस्फोट हुआ।
  • भाप का दबाव इतना भयानक था कि इसकी चपेट में आकर वहां काम कर रहे कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गए।
  • घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 4 कर्मचारियों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि लगभग 30 कर्मचारी बुरी तरह से घायल हो गए।
  • इसके बाद आनन-फानन में सभी घायलों को पास के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान मृतकों का आंकड़ा 13 तक पहुंच गया।

पीएम मोदी और सीएम साय ने जताया गहरा दुख

इस भीषण औद्योगिक त्रासदी पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

  • प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं जताते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से प्रत्येक मृतक के परिवार को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।
  • इसके अलावा, सभी घायलों को 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। पीएम मोदी ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की है।

वहीं, प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी इस घटना पर गहरा दुख प्रकट किया है। राज्य सरकार की ओर से मुख्यमंत्री ने प्रत्येक मृतक श्रमिक के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है।

मामले की मजिस्ट्रियल और कमिश्नर स्तर की जांच के आदेश

प्रशासन ने इस गंभीर लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिलासपुर मंडल के आयुक्त (कमिश्नर) को इस पूरी त्रासदी की विस्तृत जांच करने का सख्त आदेश दिया है। इसके अलावा, जिला प्रशासन ने अपनी तरफ से दुर्घटना की एक अलग मजिस्ट्रियल जांच (Magisterial Inquiry) के भी आदेश दे दिए हैं। इस दोहरी जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि इतने बड़े पावर प्लांट में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कैसे हुई और इस जानलेवा लापरवाही के लिए असली जिम्मेदार कौन है।

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