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Share Market Crash:शेयर बाजार में हाहाकार: 4 दिनों में डूबे निवेशकों के 14 लाख करोड़, सेंसेक्स 2700 अंक टूटा; ये हैं गिरावट की 3 बड़ी वजहें

Share Market Crash:घरेलू शेयर बाजार में पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से मची भारी बिकवाली थमने का नाम नहीं ले रही है। महज 4 दिनों से भी कम समय में बीएसई (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 2700 अंक से अधिक टूट चुका है। इस तेज गिरावट के चलते बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 483 लाख करोड़ रुपये से घटकर 469 लाख करोड़ रुपये रह गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि इस अवधि में शेयर बाजार के निवेशकों के 14 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो चुके हैं।

बाजार में मची इस भारी उथल-पुथल के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल में उछाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में रिकॉर्ड तेजी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPIs) की लगातार बिकवाली को मुख्य कारण माना जा रहा है।

सेंसेक्स और निफ्टी की चाल: 4 दिनों में कैसे फिसला बाजार?(Share Market Crash)

शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला पिछले हफ्ते से ही शुरू हो गया था:

  • 23 सितंबर: सेंसेक्स 74828 के स्तर पर बंद हुआ था।
  • 24 सितंबर: बाजार भारी दबाव के साथ खुला और 1247 अंक टूटकर 73580 पर बंद हुआ।
  • 25 सितंबर: बाजार में हल्की रिकवरी दिखी और सेंसेक्स 315 अंक सुधरकर 73895 के स्तर पर पहुंचा।
  • 28 सितंबर (सोमवार): सप्ताह के पहले ही दिन बाजार को 1124 अंकों का तगड़ा झटका लगा और सेंसेक्स कई महीनों के निचले स्तर 72771 पर बंद हुआ।
  • 29 सितंबर (आज): आज के कारोबारी सत्र में भी बिकवाली जारी रही और सेंसेक्स 700 से अधिक अंक टूटकर 72064 के निचले स्तर तक आ गया।

उल्लेखनीय है कि सेंसेक्स का ऑल टाइम हाई (All Time High) 86159 का स्तर है, जो दिसंबर 2025 में दर्ज किया गया था।

वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी (Nifty) की बात करें तो पिछले 4 कारोबारी सत्रों में यह 23446 से फिसलकर 22569 के स्तर पर आ गया है। इस दौरान निफ्टी में 877 अंकों का भारी गोता लगा है। इस साल अब तक निफ्टी अपने उच्च स्तर से 15% से ज्यादा टूट चुका है।

बाजार में मची भगदड़ के 3 सबसे बड़े कारण

शेयर बाजार के जानकारों के अनुसार, घरेलू और वैश्विक स्तर पर बने इन 3 दबावों ने सेंटिमेंट को बुरी तरह बिगाड़ा है:

1. महंगा होता कच्चा तेल (Crude Oil)

अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत में गतिरोध आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में अचानक आग लग गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के संघर्ष विराम प्रस्ताव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी शर्तों को खारिज किए जाने के बाद ब्रेंट क्रूड 2% उछलकर 106.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। महंगे तेल से देश का आयात बिल बढ़ेगा, चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ेगा और महंगाई बढ़ने से कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा।

2. अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5.2% के पार

अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड का 5.2% के पार निकल जाना भारतीय शेयर बाजार के लिए खतरे की घंटी बन गया है। जब अमेरिकी बॉन्ड पर सुरक्षित और ऊंचा रिटर्न मिलता है, तो वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों (जैसे भारत) से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी डॉलर परिसंपत्तियों में लगाने लगते हैं। ऊंची बॉन्ड यील्ड इस बात का भी संकेत है कि महंगाई के चलते दुनिया भर के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने से बचेंगे।

3. विदेशी निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली

सितंबर के महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार बिकवाल बने हुए हैं। 25 सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार, FPIs ने घरेलू शेयर बाजार के जरिए लगभग 25,682 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। हालांकि, राहत की बात केवल इतनी रही कि इसी अवधि के दौरान उन्होंने प्राइमरी मार्केट (IPO बाजार) में करीब 8,551 करोड़ रुपये का निवेश किया है, लेकिन सेकेंडरी मार्केट में जारी भारी निकासी ने बाजार की कमर तोड़ दी है।

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