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Chhattisgarh Mission 2028: बीजेपी और कांग्रेस ने अभी से कसी कमर, जानिए क्या है नई रणनीति

छत्तीसगढ़ में भले ही अगले विधानसभा चुनाव में अभी काफी वक्त हो लेकिन राजनीतिक हलचलें अभी से तेज हो गई हैं। राज्य की दोनों प्रमुख पार्टियां यानी भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने Chhattisgarh Mission 2028 के लिए अपनी-अपनी रणनीतियों पर काम करना शुरू कर दिया है। एक तरफ जहां सत्ताधारी दल अपनी पकड़ और मजबूत करने के लिए अहम बैठकें कर रहा है वहीं दूसरी ओर विपक्ष हार के बाद संगठन को फिर से खड़ा करने की जद्दोजहद में लगा हुआ है। दरअसल यह कवायद इस बात का संकेत है कि अगला चुनाव बेहद दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण होने वाला है।

बीजेपी का संगठन और प्रशिक्षण पर जोर

Chhattisgarh Mission 2028: भारतीय जनता पार्टी ने आगामी चुनावों के मद्देनजर अपनी संगठनात्मक रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में 12 और 13 मई को पार्टी की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक में प्रदेश पदाधिकारी कोर ग्रुप के सदस्य और कार्यसमिति के तमाम बड़े नेता शामिल होंगे। प्रदेश महासचिव नवीन मार्कंडेय के मुताबिक यह सत्र विशेष रूप से 2028 के विधानसभा चुनावों की रूपरेखा तैयार करने के लिए बुलाया गया है। इसके अलावा विपक्ष के खिलाफ एक निंदा प्रस्ताव भी पारित किए जाने की योजना है क्योंकि बीजेपी का मानना है कि विपक्ष लगातार जनता के बीच भ्रामक जानकारी फैला रहा है।

मंत्री केदार कश्यप ने इस विषय में जानकारी देते हुए बताया कि संगठन के संभागीय और जिला स्तर पर जो प्रशिक्षण शिविर आयोजित हुए थे उनकी भी इस बैठक में गहरी समीक्षा की जाएगी। पार्टी का मुख्य फोकस बूथ स्तर तक अपने कैडर को मजबूत करना है। इसी सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए एक धन्यवाद प्रस्ताव भी लाया जाएगा। इसके अलावा हालिया चुनावों में जनता के मिले समर्थन के लिए आभार भी व्यक्त किया जाएगा जिससे कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा जा सके।

कांग्रेस का संगठन महाअभियान और नई डेडलाइन

Chhattisgarh Mission 2028: दूसरी तरफ हालिया चुनावों में मिली हार के बाद कांग्रेस अब पूरी तरह से एक्शन मोड में आ चुकी है। पार्टी ने संगठन के दम पर वापसी करने के लिए एक बड़ा संगठन महाअभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत पूरे प्रदेश में लगभग 27 हजार बूथ कमेटियों और 15 हजार पंचायत समितियों के गठन की एक व्यापक योजना तैयार की गई है। कांग्रेस की कोशिश है कि गांव से लेकर शहर के हर एक मतदाता तक पार्टी की सीधी पहुंच सुनिश्चित की जाए ताकि खोया हुआ जनाधार वापस हासिल हो सके।

संगठन को चुस्त दुरुस्त करने के लिए 41 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है। अब सबसे बड़ी चुनौती जिला और ब्लॉक स्तर पर कार्यकारिणी के गठन की है जिसके लिए 31 मार्च की एक सख्त डेडलाइन तय कर दी गई है। पार्टी आलाकमान इस बात पर विशेष ध्यान दे रहा है कि पुराने गिले-शिकवे भुलाकर सभी गुटों को एकजुट किया जाए। हालांकि बीजेपी इस पूरे अभियान को महज एक दिखावा बता रही है। बीजेपी नेताओं का तर्क है कि कांग्रेस के पास न तो कोई मजबूत नेतृत्व बचा है और न ही जनता के बीच ले जाने के लिए कोई ठोस मुद्दा है। अब देखना यह होगा कि दोनों पार्टियों की ये शुरुआती रणनीतियां आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की सियासत का ऊंट किस करवट बिठाती हैं।

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