Raipur Property Tax Survey: रायपुर में 10 साल बाद बड़े स्तर पर प्रॉपर्टी सर्वे की तैयारी

घर में दुकान-कैफे चला रहे हैं तो बदल सकता है टैक्स
रायपुर नगर निगम शहर की संपत्तियों का व्यापक सर्वे कराने की तैयारी कर रहा है। (Raipur Property Tax Survey) सर्वे का प्रमुख उद्देश्य ऐसी संपत्तियों की पहचान करना है जिनका रिकॉर्ड में उपयोग आवासीय है, लेकिन मौके पर उनका उपयोग दुकान, कार्यालय, कैफे, कोचिंग सेंटर, रेस्टोरेंट या दूसरी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार नगर निगम करीब दस साल बाद इस स्तर का सर्वे कराने की तैयारी में है। निगम का अनुमान है कि शहर में 12 हजार से अधिक ऐसी संपत्तियां हो सकती हैं जहां वास्तविक उपयोग और संपत्ति कर की श्रेणी अलग है।
Raipur Property Tax Survey: क्यों हो रहा नया सर्वे?
नगर निगम संपत्ति कर का निर्धारण संपत्ति के उपयोग सहित विभिन्न मानकों के आधार पर करता है। आवासीय और व्यावसायिक उपयोग पर देय कर में अंतर हो सकता है।
यदि कोई मकान रिकॉर्ड में आवासीय है, लेकिन उसी परिसर का उपयोग दुकान, रेस्टोरेंट, कोचिंग, कपड़ा व्यवसाय, किराना दुकान या दूसरे व्यावसायिक काम के लिए हो रहा है, तो निगम यह जांच सकता है कि टैक्स सही श्रेणी में जमा हो रहा है या नहीं।
रिपोर्ट में निगम के अनुमान के हवाले से कहा गया है कि गलत कर श्रेणी के कारण सालाना 5 से 10 करोड़ रुपये तक राजस्व प्रभावित हो सकता है। इसे फिलहाल निगम का अनुमान माना जाना चाहिए, अंतिम ऑडिट आंकड़ा नहीं।
सितंबर के आखिर या अक्टूबर की शुरुआत में सर्वे
सर्वे सितंबर के आखिरी हिस्से या अक्टूबर की शुरुआत में शुरू किए जाने की योजना बताई गई है। इसके लिए तकनीकी कंपनी या एजेंसी के चयन की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।
LiDAR तकनीक के उपयोग के साथ मैदानी सत्यापन किए जाने की तैयारी है।
LiDAR क्या करेगा?
LiDAR तकनीक लेजर आधारित माप के जरिये भवनों और भौतिक संरचनाओं का डिजिटल डेटा तैयार करने में उपयोग की जाती है। हालांकि केवल तकनीकी सर्वे के आधार पर संपत्ति का व्यावसायिक उपयोग तय करना पर्याप्त नहीं होगा।
इसी कारण निगम की टीम मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन भी कर सकती है। वहां देखा जाएगा कि संपत्ति का उपयोग वास्तव में किस उद्देश्य से हो रहा है।
गलत श्रेणी मिली तो नोटिस और पेनल्टी
राजस्व विभाग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक यदि किसी संपत्ति पर आवासीय दर से टैक्स जमा हो रहा है लेकिन मौके पर उसका उपयोग व्यावसायिक पाया जाता है, तो संबंधित संपत्ति को व्यावसायिक कर श्रेणी में लाया जा सकता है।
इसके बाद अंतर की राशि के लिए मांग पत्र और नियमों के अनुसार पेनल्टी की कार्रवाई हो सकती है।
कितने पिछले वर्षों का अंतर वसूला जाएगा और पेनल्टी की गणना किस नियम से होगी, यह प्रत्येक मामले में लागू नगर निगम नियमों और नोटिस पर निर्भर करेगा।
घर से छोटा व्यवसाय चलाने वालों के लिए बड़ा सवाल
रायपुर में बड़ी संख्या में लोग मकान के किसी हिस्से से दुकान, ट्यूशन, ब्यूटी पार्लर, क्लीनिक या अन्य छोटा व्यवसाय चलाते हैं। सर्वे में ऐसे मामलों का वर्गीकरण कैसे किया जाएगा, यह महत्वपूर्ण रहेगा।
पूरे भवन के व्यावसायिक उपयोग और केवल एक हिस्से के व्यावसायिक उपयोग के मामलों में कर निर्धारण कैसे होगा, इसे लेकर नागरिकों को निगम की विस्तृत प्रक्रिया देखनी चाहिए।
रिकॉर्ड जांच लेना बेहतर
संपत्ति मालिक नगर निगम रिकॉर्ड में अपनी संपत्ति की दर्ज श्रेणी, क्षेत्रफल और उपयोग संबंधी जानकारी पहले से देख सकते हैं। यदि कोई तथ्य गलत है तो सुधार की नियमानुसार प्रक्रिया अपनाना भविष्य के विवाद से बचा सकता है।
सर्वे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी
रिपोर्ट में नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं और नागरिक सुविधाओं पर अधिक ध्यान देने की बात कही है।
दूसरी ओर एमआईसी सदस्य दीपक जायसवाल ने वास्तविक उपयोग के मुताबिक संपत्ति कर की श्रेणी सही किए जाने को उचित बताया है।
दोनों टिप्पणियां राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण हैं। अंतिम कर निर्धारण निगम के लागू नियमों के आधार पर होना चाहिए।
निगम के लिए राजस्व, नागरिकों के लिए पारदर्शिता की परीक्षा
सर्वे से नगर निगम की आय बढ़ सकती है, लेकिन प्रक्रिया की विश्वसनीयता तभी बनी रहेगी जब संपत्तियों का वर्गीकरण स्पष्ट नियमों के आधार पर हो और मालिकों को आपत्ति या सुधार का उचित अवसर मिले।
सर्वे शुरू होने के बाद वास्तविक संख्या स्पष्ट होगी कि कितनी संपत्तियां रिकॉर्ड से अलग उपयोग में पाई गईं और उनसे निगम के राजस्व पर कितना असर पड़ा।






