CGPSC घोटाला: टामन सिंह सोनवानी 30 जुलाई तक ED रिमांड पर, अब मनी ट्रेल की जांच

रायपुर। CGPSC भर्ती मामले में अब जांच का केंद्र केवल परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी तक सीमित नहीं है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर कथित अवैध रकम के स्रोत और उसके लेन-देन की जांच शुरू की है। ईडी की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक गिरफ्तारी 25 जुलाई 2026 को हुई, जबकि इसकी प्रेस विज्ञप्ति 27 जुलाई को जारी की गई। रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत ने सोनवानी को 30 जुलाई 2026 तक ईडी की हिरासत में भेजा है।
आज 29 जुलाई तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में ईडी ने पूछताछ से निकले किसी नए व्यक्ति का नाम, नई बरामदगी या संपत्ति कुर्क किए जाने की घोषणा नहीं की है। इसलिए फिलहाल सबसे बड़ा अपडेट यही है कि एजेंसी को सोनवानी से पूछताछ और कथित मनी ट्रेल की पड़ताल के लिए 30 जुलाई तक का समय मिला है। आगे अदालत में पेशी के बाद ही स्पष्ट होगा कि ईडी अतिरिक्त रिमांड मांगेगी, न्यायिक हिरासत की मांग करेगी या जांच से जुड़ा कोई नया तथ्य रिकॉर्ड पर रखेगी।
किन परीक्षाओं की जांच कर रही है ईडी?
ईडी ने यह मामला रायपुर की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की एफआईआर तथा बाद में हुई सीबीआई जांच के आधार पर दर्ज किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि वर्ष 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं के संचालन में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार किया गया। ईडी के अनुसार प्रश्नपत्र कथित रूप से लीक किए गए और चयन प्रक्रिया में हेरफेर कर कुछ रिश्तेदारों तथा पसंदीदा अभ्यर्थियों को डिप्टी कलेक्टर और उप पुलिस अधीक्षक जैसे वरिष्ठ पदों तक पहुंचाने की कोशिश हुई।
एजेंसी ने एक महत्वपूर्ण दावा भर्ती नियमों में हुए बदलाव को लेकर किया है। ईडी का कहना है कि वर्ष 2021 में आयोग के नियमों में संशोधन कर “भतीजे” को परिवार की परिभाषा से बाहर किया गया। एजेंसी इसे रिश्तेदारों के चयन का रास्ता आसान करने वाली कार्रवाई बता रही है। हालांकि यह ईडी की जांच का दावा है; इसकी अंतिम न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
नकद और बैंक लेन-देन की पड़ताल
ईडी की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि कथित अपराध से प्राप्त रकम का कुछ हिस्सा नकद में लिया गया और कुछ रकम कई स्तरों वाले बैंक लेन-देन के जरिए घुमाई गई। इसी कथित रकम का स्रोत, रास्ता और अंतिम लाभार्थी पता करना एजेंसी की मौजूदा जांच का मुख्य हिस्सा है। ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयान में सोनवानी ने टालमटोल वाले जवाब दिए और महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए। सोनवानी या उनके वकीलों की ओर से इस ताजा ईडी कार्रवाई पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
सीबीआई जांच में पहले क्या हुआ?
इस मामले की सीबीआई जांच पहले से चल रही है। सीबीआई के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार सोनवानी और उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल को 18 नवंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया था। जनवरी 2025 में पांच अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और 16 जनवरी 2025 को सात लोगों के खिलाफ विशेष सीबीआई अदालत में आरोपपत्र पेश किया गया। सीबीआई ने उस समय कहा था कि अन्य अभ्यर्थियों, आयोग के अधिकारियों और कथित बड़ी साजिश की जांच जारी है।
यहां एक जरूरी कानूनी फर्क समझना होगा। सीबीआई की जांच का केंद्र कथित भर्ती अनियमितता, साजिश और भ्रष्टाचार है, जबकि ईडी यह देख रही है कि कथित अपराध से कोई आर्थिक लाभ पैदा हुआ या नहीं, वह रकम कहां से आई और किसके पास पहुंची। ईडी की हिरासत को दोष सिद्ध होना नहीं माना जा सकता। सोनवानी और अन्य आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में विचाराधीन हैं और अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
CGPSC की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह मामला इसलिए भी अहम है, क्योंकि विवाद केवल कुछ नियुक्तियों का नहीं, पूरी प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था पर भरोसे का है। अब नजर 30 जुलाई की अदालत पेशी पर रहेगी। उसी दिन यह साफ हो सकता है कि मनी ट्रेल की जांच किस दिशा में बढ़ी और ईडी आगे क्या कदम उठाना चाहती है।






