छत्तीसगढ़ बिजली दर वृद्धि: उत्पादन में नंबर वन राज्य पर ही महंगी बिजली की मार

छत्तीसगढ़ देश में बिजली उत्पादन के मामले में अग्रणी राज्यों में गिना जाता है। (Chhattisgarh Electricity Rate Hike) राज्य में निजी, सरकारी और केंद्रीय सेक्टर मिलाकर करीब 24 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है, जिसमें निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 13 हजार 168 मेगावाट है, जो देश में सबसे ज्यादा है। इसके बावजूद 1 जुलाई 2026 से राज्य में लागू हुई नई टैरिफ दरों ने आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डाला है।
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए औसतन 6.23 प्रतिशत की दर वृद्धि को मंजूरी दी है, जबकि बिजली वितरण कंपनी ने शुरुआत में 24 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा था। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 0 से 100 यूनिट तक की दर 4.10 रुपये से बढ़ाकर 4.40 रुपये प्रति यूनिट कर दी गई है। इसी तरह 101 से 200 यूनिट पर 4.50 रुपये, 201 से 400 यूनिट पर 6 रुपये, 401 से 600 यूनिट पर 7 रुपये और 600 यूनिट से अधिक खपत पर 8.80 रुपये प्रति यूनिट की दर तय की गई है।
आयोग के अनुसार राज्य के करीब 60 लाख घरेलू उपभोक्ता इस वृद्धि से प्रभावित होंगे। खपत के आधार पर मासिक बिल में 30 रुपये से लेकर 500 रुपये तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए दरों में 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट और कृषि पंप कनेक्शन के लिए 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है।
आयोग के सचिव सूर्य प्रकाश शुक्ला के मुताबिक बिजली कंपनी को एक यूनिट बिजली पहुंचाने में औसतन 7.13 रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जबकि मौजूदा दरों से उसे केवल 6.71 रुपये की आय हो रही थी। इसी अंतर को पाटने के लिए टैरिफ में संशोधन किया गया है।
हालांकि आयोग ने कुछ राहत भी दी है। मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान के तहत 400 यूनिट तक खपत करने वाले निम्न आय वर्ग के उपभोक्ताओं को पहले 200 यूनिट पर आधा बिल देने की सुविधा जारी रहेगी। बस्तर और सरगुजा संभाग के आदिवासी क्षेत्रों के छात्रावासों को अब घरेलू श्रेणी में रखा जाएगा, जिससे उनके बिल में कमी आएगी। वहीं गैर सब्सिडी वाले कृषि कनेक्शन पर किसानों को मिलने वाली छूट 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है।
इस फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज़ हो गई है। कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का आरोप लगाते हुए प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। वहीं सरकार का तर्क है कि छत्तीसगढ़ की बिजली दरें अब भी झारखंड, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों से कम हैं।
देर से बिल जमा करने पर लगने वाला सरचार्ज भी अब 1.5 प्रतिशत प्रति माह की जगह 0.04 प्रतिशत प्रतिदिन के हिसाब से वसूला जाएगा, जबकि अग्रिम भुगतान पर मिलने वाली छूट 1.25 प्रतिशत से घटाकर 0.75 प्रतिशत कर दी गई है।






