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Strait of Hormuz: होर्मुज जलडमरूमध्य से US ने शुरू किया माइंस हटाने का काम, जानें कब गुजरेंगे जहाज? | Strait of Hormuz News

Strait of Hormuz:वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से एक बेहद अहम खबर सामने आई है। दरअसल, ईरान द्वारा बिछाई गई घातक समुद्री बारूदी सुरंगों (सी-माइंस) को हटाने के लिए अमेरिकी नौसेना ने अब एक बड़ा और आक्रामक ऑपरेशन शुरू कर दिया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि इस रास्ते के बंद होने से पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट का खतरा पैदा हो गया था। परिणामस्वरूप, अब यह उम्मीद जगी है कि जल्द ही वाणिज्यिक जहाज इस जलमार्ग से पहले की तरह सुरक्षित गुजर सकेंगे।

माइंस हटाने में लग सकते हैं 6 महीने, ऑयल मार्केट पर पड़ेगा असर

अमेरिकी राष्ट्रपति और रक्षा विभाग के सख्त निर्देशों के बाद, यूएस नेवी के विध्वंसक पोत जैसे यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन और अन्य हाई-टेक उपकरण इस इलाके में पहुंच चुके हैं। हालांकि, इस पूरे रास्ते को सुरक्षित बनाने की राह इतनी आसान नहीं है।

  • रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, समुद्र की गहराई में बिछाई गई इन विस्फोटकों को पूरी तरह से साफ करने में करीब 6 महीने का लंबा वक्त लग सकता है।
  • इसके अलावा, गोल्डमैन सैक्स रिसर्च की ताजा रिपोर्ट बताती है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के आंशिक रूप से खुलने पर भी खाड़ी क्षेत्र का कच्चा तेल उत्पादन काफी हद तक पटरी पर लौट सकता है।
  • लेकिन, युद्ध-पूर्व के स्तर तक पूरी तरह से वापसी करने में अभी कई तिमाहियां लग सकती हैं।
  • बीमा कंपनियों और जहाज के कप्तानों को संतुष्ट करने के लिए इस मार्ग का सौ फीसदी सुरक्षित होना अनिवार्य है।

कुल मिलाकर, अमेरिका ने इन माइंस को हटाने के लिए अपने पानी के भीतर चलने वाले खास ड्रोन और गोताखोरों की टीमों को भी तैनात कर दिया है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी से बचाने की अहम कवायद

यह जलमार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल के परिवहन का गवाह है। इसलिए, इसका बंद होना किसी भी हाल में वैश्विक बाजार के लिए सही नहीं है। अमेरिकी नौसेना के मध्य पूर्व कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने स्पष्ट किया है कि वे समुद्री उद्योग के साथ जल्द ही एक सुरक्षित मार्ग साझा करेंगे। दरअसल, यह केवल एक सैन्य अभियान नहीं है, बल्कि दुनिया को महंगाई और मंदी के गहरे संकट से बाहर निकालने की एक बहुत बड़ी कवायद है। इसलिए, सभी की निगाहें अब अमेरिका के इस ‘माइन-क्लीयरेंस’ मिशन की सफलता पर टिकी हुई हैं।

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