Raipur Patrakar Housing Society: रायपुर पत्रकार हाउसिंग सोसाइटी विवाद: 4 साल से न AGM, न हिसाब; आज चुना जाएगा नया अध्यक्ष

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी स्थित रायपुर पत्रकार हाउसिंग सोसाइटी (राजधानी पत्रकार गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित) में भारी वित्तीय गड़बड़ी और अनियमितताओं का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अगर किसी सहकारी समिति में साढ़े चार साल तक आम सभा (AGM) ही न हो और सदस्यों को आय-व्यय का कोई ब्यौरा न मिले, तो सवाल उठना लाजिमी है।
इसी विवाद के बीच आज समिति की एक महत्वपूर्ण जनरल बॉडी मीटिंग बुलाई गई है, जिसमें नए अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा।
अध्यक्ष प्रेम पाठक के कार्यकाल पर उठे गंभीर सवाल

आज होने वाली बैठक केवल नए अध्यक्ष के चुनाव तक सीमित नहीं रहेगी। इस दौरान वर्तमान अध्यक्ष प्रेम पाठक के कार्यकाल में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं पर भी तीखी बहस होने की पूरी संभावना है।
समिति के कई सदस्यों का स्पष्ट आरोप है कि पिछले करीब साढ़े चार वर्षों से न तो कोई जनरल बॉडी मीटिंग आयोजित की गई है और न ही सदस्यों के साथ समिति के वित्तीय लेन-देन या कार्यों की कोई जानकारी साझा की गई है। बार-बार जानकारी मांगने के बावजूद सदस्यों को कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
उपाध्यक्ष के इस्तीफे से गहराया मामला
यह मामला तब और अधिक गंभीर हो गया, जब समिति की उपाध्यक्ष ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे में अध्यक्ष की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
- उनका आरोप है कि उन्हें समिति की महत्वपूर्ण जानकारियों से जानबूझकर दूर रखा गया।
- इसके अलावा, उनकी जानकारी और सहमति के बिना ही ‘बैंक खाते के सिग्नेटरी’ (Bank Signatory) में मनमाने ढंग से बदलाव कर दिया गया। इस घटना के बाद से समिति के भीतर पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।
आज की बैठक में हो सकते हैं कड़े फैसले
वर्तमान नेतृत्व के रवैये को लेकर पत्रकारों की इस हाउसिंग सोसाइटी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। अधिकांश सदस्यों का मानना है कि समिति का संचालन बिल्कुल भी लोकतांत्रिक और पारदर्शी तरीके से नहीं किया गया।
यही वजह है कि आज नए अध्यक्ष के चुनाव की नौबत आ गई है। जानकारी के अनुसार, इस बैठक में कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की गहन जांच कराने, सक्षम अधिकारियों को शिकायत भेजने और वैधानिक कार्रवाई करने जैसे अहम प्रस्तावों पर भी मुहर लग सकती है। ऐसे में आज की यह बैठक समिति के भविष्य और इसके प्रशासनिक ढांचे के लिए बेहद निर्णायक मानी जा रही है।






