Bilaspur High Court: 27 साल पहले बर्खास्त शिक्षक के मामले में हाई कोर्ट का बड़ा आदेश; कोरबा कलेक्टर को 30 दिन में निर्णय लेने का निर्देश

बिलासपुर हाई कोर्ट (Bilaspur High Court) ने करीब 27 साल पहले जाति विवाद के कारण नौकरी से बर्खास्त किए गए कोरबा जिले के एक सहायक शिक्षक के मामले में अहम आदेश जारी किया है।
जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कलेक्टर, कोरबा (Collector, Korba) को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता के लंबित अभ्यावेदन (Representation) पर 30 दिनों के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लिया जाए। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फैसला लेते समय अदालत के वर्ष 2010 के फैसले और राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति के वर्ष 2015 के निष्कर्षों को अनिवार्य रूप से ध्यान में रखा जाए।
खबर की मुख्य बातें (Bilaspur High Court)
- 30 दिन की डेडलाइन: हाई कोर्ट (Bilaspur High Court) ने कोरबा कलेक्टर को 30 दिनों के भीतर अभ्यावेदन निपटाने के दिए निर्देश।
- 27 साल पुराना मामला: 1999 में जाति विवाद के कारण बर्खास्त किए गए थे सहायक शिक्षक मंगल साय सिंह।
- जाति समिति की रिपोर्ट: 2015 में राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने माना था कि शिक्षक ‘भारिया’ (ST) वर्ग से हैं।
- हाई कोर्ट का रुख: कोर्ट ने सीधे बहाली न देकर सक्षम प्राधिकारी को विधि अनुसार निर्णय लेने को कहा।
1999 में हुई थी बर्खास्तगी, 2010 में निरस्त हुआ था आदेश
पूरा मामला कोरबा जिले के सहायक शिक्षक मंगल साय सिंह भारिया का है। उनकी नियुक्ति 9 सितंबर 1988 को सहायक शिक्षक के पद पर हुई थी।
- बाद में उनकी जाति को लेकर विवाद खड़ा हो गया और विभाग ने आरोप लगाया कि वे ‘भारिया (कोष्ठा)’ जाति से हैं, जो अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में आती है। इसके आधार पर 7 अप्रैल 1999 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
- मंगल साय सिंह ने इस बर्खास्तगी को हाई कोर्ट (Bilaspur High Court) में चुनौती दी।
- हाई कोर्ट ने 20 अप्रैल 2010 को बर्खास्तगी आदेश को निरस्त कर दिया था और मामले को राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति (High Powered Caste Scrutiny Committee) के पास जांच के लिए भेजा था।
2015 में जाति समिति ने माना- अनुसूचित जनजाति (ST) हैं
हाई कोर्ट के निर्देश पर राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति ने पूरे मामले और दस्तावेजों की पड़ताल की। समिति ने 8 अक्टूबर 2015 को अपना अंतिम आदेश जारी करते हुए माना कि मंगल साय सिंह की वास्तविक जाति ‘भारिया’ ही है, जो कि अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के अंतर्गत आती है।
इस रिपोर्ट के पक्ष में आने के बावजूद प्रशासनिक हीलाहवाली के कारण उन्हें न तो सेवा में वापस लिया गया और न ही बकाया सेवा लाभ (Consequential Benefits) दिए गए।
कलेक्टर से लगाई थी गुहार, अब हाई कोर्ट का निर्देश
लगातार विभागीय चक्कर काटने के बाद याचिकाकर्ता ने 10 अगस्त 2026 को कलेक्टर, कोरबा के समक्ष पुनर्नियुक्ति और सभी बकाया सेवा लाभों के लिए नया अभ्यावेदन दिया। कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने दोबारा हाई कोर्ट का रुख किया।
सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट (Bilaspur High Court) को आश्वस्त किया कि यदि अभ्यावेदन लंबित है, तो उसका निर्धारित समय में कानूनन निराकरण कर दिया जाएगा।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट (Bilaspur High Court) ने याचिका को अंतिम रूप से निस्तारित करते हुए कलेक्टर को 30 दिन में विधिवत फैसला लेने को कहा है। हालांकि, कोर्ट ने इस चरण में सीधे बहाली का आदेश न देकर सक्षम प्राधिकारी को ही निर्णय का अधिकार दिया है।






