Mor Gaon Mor Paani Abhiyan: छत्तीसगढ़ में 52 एकड़ में बन रहा जल संरक्षण का अनूठा मॉडल; 200 लाख लीटर रिचार्ज होगा भू-जल, ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार

State News (Manendragarh/Raipur): छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण, पर्यावरण और रोजगार सृजन को लेकर एक बड़ी और सकारात्मक पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और पंचायत मंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में Mor Gaon Mor Paani Abhiyan (मोर गांव-मोर पानी अभियान) अब पूरे प्रदेश में एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है।
इस अभियान के तहत विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (VB-G RAM-G) के जरिए प्रदेश भर में लाखों मानव-दिवस का रोजगार पैदा किया जा रहा है। इसी कड़ी में मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में जल संरक्षण का एक ऐसा उत्कृष्ट मॉडल तैयार किया गया है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान साबित होगा।
खबर की मुख्य बातें (Highlights)
- विशाल मॉडल: एमसीबी जिले के ग्राम पंचायत बरदर में 52 एकड़ क्षेत्र में जल संरक्षण मॉडल विकसित किया जा रहा है।
- बचेगा पानी: इस प्रोजेक्ट से इलाके में 200 लाख लीटर भू-जल रिचार्ज (Groundwater Recharge) क्षमता विकसित हुई है।
- हरियाली पर जोर: ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 2000 से ज्यादा फलदार पौधे रोपे जा रहे हैं।
- रोजगार की गारंटी: इस अभियान से स्थानीय ग्रामीणों को अपने ही गांव में सीधा रोजगार मिल रहा है।
52 एकड़ में तैयार हो रहा जल संरक्षण और हरियाली का अनूठा मॉडल
एमसीबी जिले की खड़गवां जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत बरदर में Mor Gaon Mor Paani Abhiyan के तहत 52 एकड़ जमीन पर समेकित (Integrated) जल संरक्षण और हरित विकास मॉडल विकसित किया जा रहा है।
इस 52 एकड़ में से 30 एकड़ क्षेत्र में कंटूर ट्रेंच (खाई) और वर्षाजल संग्रहण के ढांचे बनाए गए हैं। वहीं, बचे हुए 22 एकड़ क्षेत्र में लगभग 2,000 फलदार और अन्य पौधों का रोपण शुरू कर दिया गया है। यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन का एक शानदार उदाहरण बनेगा।
मंत्री ने खुद खोदी कंटूर ट्रेंच, दिया ‘एक पेड़ मां के नाम’ का संदेश
ग्राम बरदर में आयोजित इस जनभागीदारी कार्यक्रम में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री एवं मनेन्द्रगढ़ विधायक श्याम बिहारी जायसवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। लोगों को प्रेरित करने के लिए मंत्री जायसवाल ने खुद फावड़ा उठाया और कंटूर ट्रेंच की खुदाई की। उन्होंने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा, “जल संरक्षण केवल आज की जरूरत नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।”
200 लाख लीटर पानी होगा रिचार्ज, सिंचाई और खेती को मिलेगा बूम
अधिकारियों के मुताबिक, बरदर में किए गए इन कार्यों से इस क्षेत्र में लगभग 200 लाख लीटर भू-जल रिचार्ज क्षमता विकसित हो गई है। इसका सीधा फायदा आने वाले समय में सिंचाई, पीने के पानी की उपलब्धता और कृषि उत्पादकता (Agriculture Productivity) बढ़ाने में मिलेगा।
सरकार का मुख्य उद्देश्य VB-G RAM-G और Mor Gaon Mor Paani Abhiyan के माध्यम से हर ग्राम पंचायत को जल-सुरक्षित, हरा-भरा और आत्मनिर्भर बनाना है।






