Sports

Kuldeep Yadav: गॉल टेस्ट में ‘फ्लॉप’ होने के बाद उठे सवाल, क्या खतरे में है कुलदीप यादव का टेस्ट करियर?

Kuldeep Yadav: गॉल टेस्ट मैच शुरू होने से पहले भारतीय क्रिकेट फैंस के दिलों में कुलदीप यादव (Kuldeep Yadav) के लिए जो सॉफ्ट कॉर्नर था, वह अब धीरे-धीरे चिढ़ में बदलता दिख रहा है। जो सहानुभूति थी, वह सवालों और निराशा में तब्दील हो रही है।

पहले क्रिकेट फैंस और एक्सपर्ट्स अक्सर कहते थे कि कुलदीप यादव के साथ अन्याय होता है। इतने सीनियर और मैच विनर प्लेयर को अक्सर प्लेइंग इलेवन (Playing XI) से बाहर रखा जाता है। मगर, श्रीलंका के खिलाफ जिस गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम (Galle International Stadium) की पिच पर स्पिनर्स का बोलबाला रहा (20 में से 15 विकेट स्पिनर्स को मिले), वहां कुलदीप यादव की गेंदबाजी बेहद फीकी और धारहीन नजर आई।

खबर की मुख्य बातें (Highlights)

  • गॉल टेस्ट में फ्लॉप: श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट में कुलदीप यादव को मिला सिर्फ 1 विकेट।
  • स्पिनर्स की पिच: जडेजा (4 विकेट) और मानव सुथार (10 विकेट) ने मचाया गदर, कुलदीप रहे बेअसर।
  • कंट्रोल की कमी: गॉल में लाइन-लेंथ पर संघर्ष करते दिखे कुलदीप।
  • करियर पर सवाल: क्या मानव सुथार और सारांश जैन जैसे युवा स्पिनर्स कुलदीप के लिए बन रहे हैं खतरा?

जड्डू-सुथार को 14, तो कुलदीप को सिर्फ एक विकेट क्यों?

19 अगस्त को खत्म हुए दो टेस्ट मैच की सीरीज के पहले मुकाबले में भारत ने श्रीलंका को 165 रन के बड़े अंतर से मात दी। भारत की यह ऐतिहासिक जीत जितनी बड़ी थी, उतना ही बड़ा सवाल कुलदीप यादव के प्रदर्शन पर खड़ा हो गया है।

जिस स्पिन-फ्रेंडली पिच पर भारत के दो लेफ्ट-आर्म ऑर्थोडॉक्स स्पिनर्स— रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) (4 विकेट) और 24 साल के युवा मानव सुथार (Manav Suthar) (10 विकेट) ने श्रीलंकाई बल्लेबाजों की कमर तोड़ दी, वहां कुलदीप बुरी तरह फ्लॉप हो गए।

क्या कुलदीप यादव के तरकश के तीर खत्म हो गए हैं? बाएं हाथ के ‘चाइनामैन’ स्पिनर कुलदीप ने पहली पारी में 14 ओवर गेंदबाजी की और 65 रन देकर बमुश्किल 1 विकेट लिया। दूसरी पारी में तो वे एक-एक विकेट के लिए तरसते नजर आए। यह प्रदर्शन फैंस और टीम मैनेजमेंट दोनों को इसलिए भी चुभ रहा है, क्योंकि माना जा रहा था कि गॉल की टर्निंग कंडीशन कुलदीप के लिए सबसे मुफीद (Suitable) होगी।

कुलदीप की सबसे बड़ी ताकत बल्लेबाजों के दिमाग से खेलना और हवा में गेंद को ड्रिफ्ट कराना है। लेकिन इस टेस्ट में न तो वह सही गुगली (Googly) फेंक पाए और न ही गेंद को तेजी से टर्न करा पाए।

सिर्फ टर्न नहीं, बात कंट्रोल और लेंथ की भी है

गॉल टेस्ट में रवींद्र जडेजा और मानव सुथार ने सिर्फ गेंद को टर्न कराकर विकेट नहीं लिए, बल्कि उन्होंने लगातार सटीक लाइन और लेंथ (Line and Length) पर गेंदबाजी की। इससे श्रीलंकाई बल्लेबाजों पर भारी दबाव बना।

दूसरी तरफ, कुलदीप की चुनौती अलग है। वह पारंपरिक फिंगर स्पिनर (Finger Spinner) नहीं हैं, बल्कि एक रिस्ट स्पिनर (Wrist Spinner) हैं।

  • कुलदीप तभी असरदार होते हैं, जब वह हवा में गेंद की गति में बदलाव करते हैं और उनकी रिस्ट पोजिशन (Wrist Position) सही होती है।
  • यदि वह अपनी लेंथ से थोड़ा भी चूकते हैं, तो बल्लेबाजों के लिए उन्हें पढ़ना और मारना आसान हो जाता है। गॉल में उनके साथ बिल्कुल यही हुआ।

क्या कुलदीप यादव का टेस्ट करियर खतरे में है?

आप मानें या न मानें, लेकिन सच्चाई यही है कि कुलदीप यादव को टेस्ट क्रिकेट में कभी वह ‘निरंतरता’ (Consistency) नहीं मिली, जिसकी टीम इंडिया को एक फ्रंटलाइन स्पिनर से जरूरत होती है।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि कुलदीप को जब भी मौका मिलता है, वह टीम में अपनी जगह ‘पक्की’ करने के दबाव में होते हैं, जो टेस्ट क्रिकेट में आदर्श स्थिति नहीं है। गॉल टेस्ट में भी कप्तान उन्हें लंबे स्पैल नहीं दे रहे थे। उन्हें केवल तब गेंद थमाई जा रही थी, जब पुरानी कूकाबूरा गेंद (Kookaburra Ball) से विकेट निकालने की दरकार थी, जो किसी भी रिस्ट स्पिनर के लिए मुश्किल काम होता है।

अब खुद का करियर बचाने की है लड़ाई

कुलदीप यादव की लड़ाई अब सिर्फ आर अश्विन या रवींद्र जडेजा से नहीं है। गॉल टेस्ट में मानव सुथार ने जिस कातिलाना अंदाज में गेंदबाजी की है, उसने टीम मैनेजमेंट को एक तगड़ा और फ्रेश विकल्प दे दिया है।

इतना ही नहीं, भारतीय स्क्वॉड में शामिल किए गए ऑफ स्पिनर सारांश जैन (Saransh Jain) भी अपने टेस्ट डेब्यू (Test Debut) का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। सारांश का घरेलू क्रिकेट में रिकॉर्ड शानदार है और वह लोअर ऑर्डर में अच्छी बल्लेबाजी भी कर सकते हैं।

कुलदीप यादव के लिए टी20 में तो वैसे भी टीम इंडिया ज्यादा भरोसा नहीं जताती। ऐसे में श्रीलंका के खिलाफ आगामी दूसरा टेस्ट मैच उनके लिए सिर्फ एक और मैच नहीं होगा, बल्कि यह उनके करियर की दशा और दिशा तय करेगा। यह साबित करने का मौका होगा कि वह टीम के ‘फ्रंटलाइन स्पिनर’ हैं या महज एक ‘स्पिन विकल्प’।

Related Articles

Back to top button