Former Maoist Devji: 62 की उम्र में वकील बनेंगे पूर्व माओवादी कमांडर देवजी, LAWCET में हासिल की 349वीं रैंक, अब संविधान से लड़ेंगे लड़ाई

हैदराबाद/बस्तर। Former Maoist Devji; कभी बस्तर (Bastar) और दंडकारण्य के घने जंगलों में सशस्त्र माओवादी संघर्ष का बड़ा चेहरा रहे 62 वर्षीय पूर्व कमांडर देवजी (Devji) की जिंदगी ने अब एक नया और बेहद प्रेरणादायक मोड़ ले लिया है। जिन हाथों ने चार दशकों तक बंदूक थामे रखी थी, वे अब कानून की किताबें पकड़कर अदालत के जरिए न्याय की लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। हाल ही में, देवजी ने तेलंगाना के लॉ एंट्रेंस टेस्ट (LAWCET) में 349वीं रैंक हासिल कर पूरे देश को चौंका दिया है।
जंगल से कोर्टरूम तक का अद्भुत सफर
Former Maoist Devji; चार दशक तक माओवादी संगठन में सक्रिय रहने के बाद देवजी (जिनका असली नाम टिप्पिरी तिरुपति है) ने इसी साल फरवरी 2026 में तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था।
- लॉ कॉलेज में प्रवेश: सरेंडर के बाद यह सवाल उठ रहा था कि क्या वे मुख्यधारा में लौट पाएंगे? देवजी ने LAWCET परीक्षा में 57 अंक और 349वीं रैंक हासिल कर इसका करारा जवाब दिया है। अब वे 5 वर्षीय लॉ डिग्री प्रोग्राम में दाखिला लेने जा रहे हैं।
- संविधान पर भरोसा: कभी व्यवस्था के खिलाफ हथियार उठाने वाले देवजी अब भारतीय संविधान (Indian Constitution) के जरिए गरीबों, आदिवासियों और वंचित समुदायों की मदद करना चाहते हैं। उनका कहना है कि अब उनकी लड़ाई का रास्ता बंदूक नहीं, बल्कि कानून होगा।
40 साल बाद लौटी पढ़ाई की ललक
देवजी की कहानी सिर्फ एंट्रेंस टेस्ट पास करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दशकों पुरानी एक अधूरी पढ़ाई को पूरा करने का जज्बा भी है।
- अधूरी रह गई थी शिक्षा: देवजी 1983-85 के दौरान कोरुटला जूनियर कॉलेज में पढ़ते थे। उसी समय वे ‘रेडिकल स्टूडेंट यूनियन’ से जुड़े और माओवादी आंदोलन में चले गए, जिससे उनकी 12वीं (इंटरमीडिएट) की पढ़ाई अधूरी रह गई थी।
- जिस पेपर का किया था बहिष्कार, वही दिया: करीब 40 साल पहले उन्होंने जिस तेलुगु विषय के पेपर का बहिष्कार कर परीक्षा छोड़ी थी, आत्मसमर्पण के बाद उसी पेपर को पास करने के लिए उन्होंने तेलंगाना बोर्ड से विशेष अनुमति ली। 13 मई को उन्होंने जगतियाल जिले के अपने पुराने परीक्षा केंद्र में बैठकर सप्लीमेंट्री परीक्षा दी और उसे पास किया।
एक करोड़ के इनामी से कानून के छात्र तक
फरवरी 2026 में जब 62 वर्षीय देवजी ने सरेंडर किया था, तब वे माओवादी संगठन के बेहद प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। सुरक्षा एजेंसियों की ‘मोस्ट वांटेड’ लिस्ट में शामिल देवजी पर एक करोड़ रुपए का इनाम घोषित था। लेकिन आज वही व्यक्ति हिंसा का रास्ता छोड़कर शिक्षा और कानून के जरिए अपने जीवन की एक बिल्कुल नई और सकारात्मक शुरुआत कर रहा है। यह कहानी भटके हुए युवाओं के लिए मुख्यधारा में लौटने की एक बड़ी मिसाल बन गई है।



