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नारायणपुर में 26 ईसाई परिवार घर से बेघर, धर्मांतरण विवाद फिर भड़का

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में धर्मांतरण को लेकर विवाद एक बार फिर सामने आया है।

Narayanpur conversion dispute Christian families evicted का यह मामला भरंडा थाना क्षेत्र के भरंडा गांव का है।

ईसाई धर्म मानने वाले 26 परिवारों का आरोप है कि मंगलवार को गांव के कुछ ग्रामीणों ने उन्हें घरों से बाहर निकाल दिया।

इन परिवारों का कहना है कि वे गांव के बाहर पेड़ों की छांव में रहने को मजबूर हैं।

मामले की जानकारी मिलते ही नारायणपुर पुलिस ने गांव में भारी बल तैनात कर दिया।

फिलहाल पूरे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।

दिसंबर 2025 से चला आ रहा है विवाद

बताया जा रहा है कि भरंडा गांव में दिसंबर 2025 से माहौल तनावपूर्ण था।

बीच-बीच में विवाद की घटनाएं सामने आती रहीं।

लेकिन 9 जून 2026 के बाद स्थिति और बिगड़ गई।

उस दिन दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई थी।

कुछ महिलाओं के घायल होने की भी सूचना मिली थी।

हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

पुलिस और प्रशासन के दखल के बाद मामला कुछ समय के लिए शांत हुआ था।

लेकिन पिछले दो दिनों से विवाद फिर से गरमा गया है।

ईसाई परिवारों का पक्ष क्या है

घरों से जबरन निकाले जाने का आरोप

ईसाई धर्म मानने वाले परिवारों का कहना है कि गांव के गयता, पटेल और कुछ अन्य ग्रामीण उनके घर पहुंचे।

उन्होंने एक-एक कर 26 परिवारों को गांव छोड़ने का आदेश दिया।

परिवारों का आरोप है कि उन्हें जबरन घरों से बाहर किया गया।

संत राम दुग्गा, चैतू कुमेटी और मनायकु वट्टी जैसे लोगों का कहना है कि वे सालों से इसी गांव में रह रहे हैं।

उनका आरोप है कि उन्हें उनके धार्मिक विश्वास के कारण निशाना बनाया जा रहा है।

उनका यह भी कहना है कि वे गांव छोड़कर नहीं जाना चाहते।

ग्रामीणों का पक्ष क्या है

आदिवासी संस्कृति पर असर का दावा

दूसरी तरफ गांव के ग्रामीणों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों ने ईसाई धर्म अपनाया है।

उनका आरोप है कि इससे उनकी पारंपरिक आदिवासी संस्कृति, रीति-रिवाजों और सामाजिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर 26 परिवार अपने मूल धर्म में वापस आ जाएं तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

यह दावा भी पूरी तरह सत्यापित नहीं है।

दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं और मामला अभी प्रशासन के सामने है।

पुलिस और प्रशासन की भूमिका

मामले की गंभीरता को देखते हुए नारायणपुर पुलिस ने पूरे गांव में सुरक्षा कड़ी कर दी है।

किसी भी तरह के टकराव को रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है।

प्रशासन दोनों पक्षों से लगातार बातचीत कर रहा है।

स्थिति को सामान्य बनाने के प्रयास जारी हैं।

आगे क्या होगा

अभी तक पुलिस की तरफ से किसी गिरफ्तारी या FIR की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

प्रशासन का कहना है कि दोनों पक्षों से बातचीत जारी है।

25 परिवार अभी भी गांव के बाहर खुले में हैं।

यह मामला आदिवासी अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सहअस्तित्व जैसे बड़े सवाल खड़े करता है।

आने वाले दिनों में प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।

इस मामले पर दोनों पक्षों का पूरा और आधिकारिक बयान अभी आना बाकी है।

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