Chhattisgarh Monsoon Rainfall 2026: कुसमी में 2563.1 मिमी बारिश, दरिमा में सिर्फ 367.2 मिमी; 19 किमी में बदली मानसून की तस्वीर

छत्तीसगढ़ में मानसून का एक ऐसा पैटर्न सामने आया है, (Chhattisgarh Monsoon Rainfall 2026) जिसमें कुछ तहसीलों में तीन महीनों के दौरान अत्यधिक बारिश दर्ज हुई, जबकि कुछ इलाकों में वर्षा का आंकड़ा बहुत कम रहा। उपलब्ध तहसीलवार आंकड़ों के अनुसार बलरामपुर जिले का कुसमी 2563.1 मिमी बारिश के साथ प्रदेश में सबसे आगे रहा। दूसरी ओर सरगुजा जिले के दरिमा में जून से अगस्त के बीच केवल 367.2 मिमी बारिश दर्ज की गई।
सबसे दिलचस्प स्थिति सरगुजा में ही है। अंबिकापुर में 1169.3 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि उससे लगभग 19 किलोमीटर दूर दरिमा में आंकड़ा 367.2 मिमी रहा। यानी बहुत कम भौगोलिक दूरी के भीतर मानसून का असर बेहद अलग दिखाई दिया।
कुसमी में सर्वाधिक, बड़े बचेली दूसरे स्थान पर
तहसीलवार वर्षा आंकड़ों में बलरामपुर जिले का कुसमी सबसे ऊपर है, जहां तीन महीनों में 2563.1 मिमी बारिश दर्ज की गई। दंतेवाड़ा जिले का बड़े बचेली 2047.6 मिमी के साथ अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में शामिल है।
इसके अलावा बीजापुर में 1484.3 मिमी, सूरजपुर जिले के ओड़गी में 1438.2 मिमी, नारायणपुर के छोटेडोंगर में 1428.0 मिमी और रायपुर शहर में 1379.9 मिमी बारिश दर्ज की गई।
ये आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश का औसत आंकड़ा अकेले हर इलाके की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शा सकता। खेती, जलभराव, स्थानीय जलस्रोत और फसल की स्थिति को समझने के लिए तहसील स्तर का डेटा अधिक उपयोगी तस्वीर देता है।
दरिमा में केवल 367.2 मिमी बारिश
कम बारिश वाले इलाकों में सरगुजा का दरिमा सबसे प्रमुख है। यहां जून, जुलाई और अगस्त के दौरान 367.2 मिमी वर्षा दर्ज हुई। बेमेतरा जिले के नवागढ़ में 382.0 मिमी, जशपुर के तपकरा में 407 मिमी, कबीरधाम के सहसपुर लोहारा में 421.4 मिमी और सुकमा जिले के तोंगपाल में 424.7 मिमी वर्षा हुई।
इससे साफ है कि एक ही मानसूनी मौसम में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों की स्थिति में बहुत बड़ा अंतर बना हुआ है।
कम दूरी, बारिश में बहुत बड़ा अंतर
सरगुजा का अंबिकापुर-दरिमा उदाहरण सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है। करीब 19 किलोमीटर की दूरी के बावजूद अंबिकापुर में 1169.3 मिमी और दरिमा में महज 367.2 मिमी वर्षा हुई।
सुकमा और तोंगपाल के बीच भी ऐसा ही अंतर दर्ज हुआ। सुकमा में 1339.8 मिमी बारिश हुई, जबकि लगभग 43 किलोमीटर दूर तोंगपाल में केवल 424.7 मिमी वर्षा हुई।
रायपुर शहर और अभनपुर के बीच भी बड़ा फर्क है। रायपुर शहर में 1379.9 मिमी बारिश के मुकाबले अभनपुर में 670.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
जिलों के भीतर भी अलग-अलग स्थिति
कांकेर जिले में पखांजूर में 640.1 मिमी और अंतागढ़ में 1033.6 मिमी बारिश हुई। कबीरधाम में सहसपुर लोहारा का आंकड़ा 421.4 मिमी रहा, जबकि कुकदूर में 864.9 मिमी दर्ज किया गया।
कोरबा जिले में हरदीबाजार में 741.0 मिमी और कोरबा में 1331.5 मिमी वर्षा हुई। दंतेवाड़ा जिले में कटेकल्याण में 803.6 मिमी के मुकाबले बड़े बचेली में 2047.6 मिमी बारिश दर्ज की गई।
दुर्ग जिले में धमधा में 483 मिमी और दुर्ग में 867.3 मिमी वर्षा हुई। बेमेतरा में नवागढ़ 382 मिमी पर रहा, जबकि बेरला में 631.8 मिमी बारिश हुई।
खेती के लिए जिला नहीं, स्थानीय वर्षा महत्वपूर्ण
छत्तीसगढ़ में मानसूनी वर्षा का सीधा संबंध खरीफ खेती से है। यही कारण है कि केवल पूरे जिले या पूरे प्रदेश के औसत को देखकर कृषि की स्थिति का आकलन अधूरा हो सकता है। एक जिले की एक तहसील में पर्याप्त बारिश और दूसरी तहसील में अपेक्षाकृत कम बारिश होने से खेतों की परिस्थिति अलग हो सकती है।
चार महीने के सामान्य मानसूनी मौसम, जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर में तीन महीने गुजर चुके हैं। इसलिए अब तक के आंकड़े मानसून की स्थानीय असमानता की महत्वपूर्ण तस्वीर पेश कर रहे हैं। सितंबर की बारिश अंतिम मौसमी तस्वीर को कुछ हद तक बदल सकती है।






