चरणदास महंत के बयान से छत्तीसगढ़ में बवाल: रामभद्राचार्य को बताया ‘फर्जी’, जगद्गुरु ने मंच से दी खुली चुनौती

रायपुर/चिरमिरी। छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों धर्म और संतों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने प्रख्यात संत जगद्गुरु रामभद्राचार्य और बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को लेकर बेहद विवादित टिप्पणी की है। महंत ने इन संतों को ‘फर्जी’ और भारतीय जनता पार्टी का प्रचारक बताया, जिसके बाद पूरे प्रदेश में सियासी और धार्मिक बवाल मच गया है।
रामभद्राचार्य का तीखा पलटवार और खुली चुनौती
चरणदास महंत के इस बयान के बाद मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले के चिरमिरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में चल रही श्री रामकथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कड़ा पलटवार किया।
- ज्ञान परीक्षण की चुनौती: रामकथा के नौवें दिन व्यासपीठ से बोलते हुए रामभद्राचार्य ने महंत को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि महंत आकर उनके ज्ञान और ‘जगद्गुरु’ होने का पूर्ण परीक्षण कर लें।
- जगद्गुरु की कसौटी: संत रामभद्राचार्य ने स्पष्ट किया कि जगद्गुरु की उपाधि के लिए तीन प्रमुख ग्रंथों का भाष्य लिखना अनिवार्य होता है और सभी अखाड़े इस नियम का समर्थन करते हैं। वह इन सभी धार्मिक कसौटियों पर पूरी तरह से खरे उतरते हैं।
- रामभक्तों पर गोलीकांड की याद: रामभद्राचार्य ने अपने बयान में अयोध्या आंदोलन का जिक्र करते हुए कांग्रेस और महंत पर निशाना साधा। उन्होंने याद दिलाया कि रामभक्तों पर लाठियां और गोलियां चलवाने वाले आज संतों पर सवाल उठा रहे हैं।
किसने क्या कहा?
इस पूरे विवाद में नेताओं और संतों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं:
- चरणदास महंत (नेता प्रतिपक्ष, कांग्रेस): उन्होंने स्पष्ट तौर पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य और पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को ‘फर्जी’ करार देते हुए उन्हें भारतीय जनता पार्टी का राजनीतिक प्रचारक बताया है।
- जगद्गुरु रामभद्राचार्य (प्रख्यात संत): व्यासपीठ से जवाब देते हुए उन्होंने महंत को अपने ज्ञान के परीक्षण की खुली चुनौती दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि महंत को संतों के सम्मान से “मिर्च लग रही है”।
- राजेश अग्रवाल (पर्यटन मंत्री, भाजपा): भारतीय जनता पार्टी ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया है। पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने महंत के बयान को सनातन संस्कृति और संतों का घोर अपमान बताते हुए कांग्रेस की मानसिकता पर तीखा प्रहार किया है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि संतों का अपमान छत्तीसगढ़ का समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा। इस पूरे घटनाक्रम ने आगामी राजनीतिक समीकरणों के बीच धार्मिक ध्रुवीकरण की बहस को फिर से तेज कर दिया है।



