PM Modi Video Row: क्या अशांति फैलाने वाले कंटेंट के लिए Meta को मिली थी मोटी रकम? अश्विनी वैष्णव ने की टीम की क्लास

PM Modi Video Row: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक (Facebook) से हटाए जाने के बाद विवाद बढ़ता जा रहा है। इस मामले में केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) के खिलाफ बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। बुधवार को मेटा के ग्लोबल अफेयर्स चीफ जोएल कैपलन (Joel Kaplan) के नेतृत्व में भारत पहुंची टीम को सरकार के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने बैठक के दौरान मेटा अधिकारियों से दो टूक पूछा कि क्या कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसा कंटेंट प्रमोट करने के लिए पेमेंट लिया है, जिससे देश में अशांति और तनाव फैल सकता है?
खबर की मुख्य बातें (Highlights)
- वैष्णव के तीखे सवाल: अश्विनी वैष्णव ने पूछा कि क्या मेटा ने अशांति फैलाने वाले कंटेंट को प्रमोट करने के लिए पैसे लिए?
- मेटा की नाकामी: अधिकारियों ने माना कि उनके सिस्टम इतने बड़े स्तर पर गैर-कानूनी कंटेंट, डीपफेक और बाल यौन शोषण सामग्री को रोकने में पूरी तरह तैयार नहीं हैं।
- बढ़ी जवाबदेही: सरकार ने साफ किया कि मेटा अब सिर्फ एक ‘मध्यस्थ’ (Intermediary) नहीं है, क्योंकि वह खुद तय करता है कि कौन सा कंटेंट किसे दिखेगा।
- ‘सेफ हार्बर’ का खतरा: माफी न मांगने पर IT Act की धारा 79(3) के तहत मेटा से कानूनी सुरक्षा (Safe Harbor) छीनी जा सकती है।
क्या अशांति फैलाने के लिए पैसा ले रहा है Meta?
बुधवार को हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मेटा की कंटेंट मॉडरेशन नीतियों पर कड़े सवाल उठाए। सूत्रों के मुताबिक, वैष्णव ने जोएल कैपलन से सीधा सवाल किया कि क्या मेटा ने ऐसे कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए भुगतान (Payment) स्वीकार किया है जो सार्वजनिक अशांति पैदा कर सकता है।
वैष्णव ने यह भी पूछा कि क्या प्लेटफॉर्म गैर-कानूनी कंटेंट को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठा रहा है? इस पर मेटा के अधिकारियों ने हैरान करने वाली बात स्वीकारी। उन्होंने माना कि डीपफेक (Deepfakes), बच्चों के यौन शोषण वाले कंटेंट और बड़े पैमाने पर फैलने वाले गैर-कानूनी सामग्री को पूरी तरह से कंट्रोल करने के लिए उनका सिस्टम अभी पूरी तरह से तैयार नहीं है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी माना कि एक खास तरह के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए बहुत सारा पैसा प्लेटफॉर्म को दिया गया था।
‘मेटा अब सिर्फ मध्यस्थ नहीं’- भारत सरकार की सख्त चेतावनी
सरकार ने मेटा की टीम को सख्त लहजे में स्पष्ट कर दिया है कि कंपनी को अब केवल एक मध्यस्थ (Intermediary) के रूप में नहीं देखा जा सकता। सरकार का तर्क है कि मेटा का एल्गोरिदम (Algorithm) खुद यह तय करता है कि कौन सा कंटेंट किस यूजर की फीड तक पहुंचेगा। इसलिए, प्लेटफॉर्म पर फैलने वाले आपत्तिजनक कंटेंट के लिए मेटा की सीधी जवाबदेही बनती है।
इस बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो को फेसबुक से हटाए जाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया, जिसने इस विवाद को तूल दिया था।
3 दिन में बिना शर्त माफी की मांग, क्या है धारा 79(3)?
इससे पहले, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी संसदीय समिति ने मेटा के सीईओ को 3 दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने का अल्टीमेटम दिया था। सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर कंपनी माफी नहीं मांगती है, तो आईटी अधिनियम के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा यानी सेफ हार्बर (Safe Harbor) वापस ली जा सकती है।
क्या है आईटी एक्ट की धारा 79(3)? सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act, 2000) की धारा 79 सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स (जैसे फेसबुक, एक्स, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम) को ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा प्रदान करती है।
- इसका मतलब है कि यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए किसी भी थर्ड-पार्टी आपत्तिजनक या अवैध कंटेंट के लिए प्लेटफॉर्म को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
- हालांकि, यह सुरक्षा तभी लागू होती है जब प्लेटफॉर्म सरकार के IT नियम, 2021 का पालन करे।
- यदि कोई प्लेटफॉर्म सरकारी आदेश या कोर्ट के निर्देश के बावजूद अवैध कंटेंट नहीं हटाता है, तो धारा 79(3) के तहत उसकी यह कानूनी सुरक्षा खत्म की जा सकती है, जिससे कंपनी और उसके अधिकारियों पर सीधे आपराधिक मुकदमे दर्ज हो सकते हैं।






