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RBI Monetary Policy: आज होगा मौद्रिक नीति का ऐलान, क्या बढ़ेगा रेपो रेट या मिलेगी राहत? जानिए क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स

RBI Monetary Policy की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक का आज (बुधवार) आखिरी दिन है। RBI गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) आज सुबह 10 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए मौद्रिक नीति समिति द्वारा लिए गए फैसलों की घोषणा करेंगे। इस घोषणा पर शेयर बाजार, निवेशकों और आम जनता (खासकर होम लोन और ऑटो लोन ग्राहकों) की पैनी नजर टिकी हुई है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या RBI एक बार फिर रेपो रेट (Repo Rate) में बढ़ोतरी करेगा या फिर ब्याज दरों को स्थिर रखकर आम आदमी को EMI के मोर्चे पर राहत देगा?

रेपो रेट बढ़ा तो क्या होगा असर?(RBI Monetary Policy)

अगर RBI रेपो रेट में बढ़ोतरी का फैसला लेता है, तो वर्तमान रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो सकता है। रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर बैंकों की ब्याज दरों पर पड़ता है, जिससे होम लोन (Home Loan), ऑटो लोन और पर्सनल लोन की EMI महंगी हो जाती है।

हालांकि, ‘बैंक ऑफ बड़ौदा’ के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस (Madan Sabnavis) का अनुमान इससे थोड़ा अलग है। उनका मानना है कि RBI अक्टूबर की इस पॉलिसी में ब्याज दरों (Interest Rates) को यथावत (Unchanged) रख सकता है और बढ़ोतरी का सिलसिला दिसंबर से शुरू कर सकता है।

RBI के सामने 3 सबसे बड़ी चुनौतियां: महंगाई, क्रूड ऑयल और रुपया

मौद्रिक नीति तय करते समय RBI के सामने इस वक्त तीन सबसे बड़ी वैश्विक और घरेलू चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं:

  1. लगातार बढ़ती महंगाई (Inflation): अगस्त महीने में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) बढ़कर 4.82% हो गई है, जबकि जुलाई में यह 4.45% थी। महंगाई का यह बढ़ता ग्राफ RBI के लिए चिंता का प्रमुख कारण है।
  2. कच्चे तेल में उबाल (Crude Oil Prices): अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। महंगे कच्चे तेल से भारत का आयात बिल बढ़ता है, जो घरेलू महंगाई को और भड़काता है।
  3. कमजोर होता रुपया (Falling Rupee): अमेरिकी डॉलर (USD) के मुकाबले भारतीय रुपया (INR) ऐतिहासिक निचले स्तर पर है और 96 के पार पहुंच गया है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर बढ़ती ‘बॉन्ड यील्ड’ (Bond Yield) ने भी दबाव बढ़ाया है।

एक्सपर्ट्स का पोल: 25 बेसिस पॉइंट बढ़ोतरी की संभावना

बाजार के ज्यादातर विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों के अनुमानों में 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) की बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार पहले ही रेपो रेट में इस बढ़ोतरी को पचा चुका है। इसलिए आज निवेशकों की नजर सिर्फ रेपो रेट के आंकड़े पर नहीं, बल्कि RBI के आगे के ‘गाइडेंस’ (Future Guidance) और गवर्नर की टिप्पणियों पर होगी, जो बाजार की अगली दिशा तय करेंगी।

‘दिसंबर से शुरू हो सकता है बढ़ोतरी का असल दौर’

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का कहना है कि RBI आक्रामक रुख अपनाने से पहले एक और बैठक तक का इंतजार कर सकता है। उनके मुताबिक, दरें स्थिर रखने से केंद्रीय बैंक को सितंबर-अक्टूबर की महंगाई दर, खरीफ फसल की पैदावार और त्योहारी सीजन (Festive Season) की मांग की स्थिति को समझने का ज्यादा समय मिल जाएगा।

क्या है आगे का अनुमान? सबनवीस का अनुमान है कि दिसंबर से RBI 25 बेसिस पॉइंट की तीन क्रमिक बढ़ोतरी कर सकता है। दिसंबर और फरवरी के बाद अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में एक और बढ़ोतरी होने से रेपो रेट कुल 75 बेसिस पॉइंट बढ़कर करीब 6% तक पहुंच सकता है।

सिस्टम में लिक्विडिटी का गणित

सबनवीस के अनुसार, वर्तमान में बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त लिक्विडिटी (Liquidity) करीब 12 लाख करोड़ रुपये से घटकर 5-6 लाख करोड़ रुपये रह गई है, लेकिन सरकारी खर्च बढ़ने से इसके फिर से बढ़ने की संभावना है।

ऐसे में यदि RBI तत्काल रेपो रेट बढ़ाता है, तो मौद्रिक नीति का असर (खासकर जमा दरों/Deposit Rates पर) आम जनता तक पहुंचने में समय लग सकता है। कुल मिलाकर, आज की MPC बैठक का फैसला दो ही संभावनाओं के इर्द-गिर्द घूम रहा है: पहला- तत्काल 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी, या दूसरा- अभी दरों को स्थिर रखकर दिसंबर से सख्त रुख (Hawkish Stance) अपनाना।

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