बस्तर में धर्मांतरण के खिलाफ लामबंद हुए ग्रामीण: ग्राम सभाओं ने बैन की पादरियों की एंट्री, डीलिस्टिंग की मांग ने पकड़ा जोर

बस्तर/रायपुर। छत्तीसगढ़ का आदिवासी बहुल बस्तर संभाग इन दिनों धर्मांतरण (Religious Conversion) के मुद्दे को लेकर सुलग रहा है। संभाग के कई गांवों में मूल आदिवासियों और ईसाई मिशनरियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। अपनी संस्कृति, प्राचीन परंपरा और देवी-देवताओं की रक्षा का हवाला देते हुए बस्तर के कई गांवों की ग्राम सभाओं ने एक बेहद कड़ा फैसला लिया है। इन ग्राम सभाओं ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर बाहरी पादरियों और ईसाई धर्म प्रचारकों के गांव में प्रवेश पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है। गांव की सीमाओं और मुख्य रास्तों पर बकायदा बड़े-बड़े चेतावनी बोर्ड लगा दिए गए हैं, जिन पर साफ लिखा है कि ‘पास्टर या पादरी का गांव में प्रवेश सख्त मना है।’
पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची का दिया हवाला
ग्रामीणों और ग्राम सभा के अध्यक्षों का कहना है कि उन्होंने यह फैसला संविधान की पांचवीं अनुसूची (5th Schedule) और पेसा कानून (PESA Act) के तहत मिले अधिकारों का उपयोग करते हुए लिया है। सर्व आदिवासी समाज का आरोप है कि भारी विदेशी फंडिंग के जरिए बाहरी लोग भोले-भाले ग्रामीणों को प्रलोभन और लालच देकर उनका धर्मांतरण करा रहे हैं। एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए समाज के नेताओं ने दावा किया है कि बस्तर क्षेत्र में हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर लोगों का अवैध रूप से धर्म परिवर्तन कराया गया है। इसी के विरोध में ग्रामीण अब खुलकर सामने आ गए हैं।
डीलिस्टिंग की मांग को लेकर दिल्ली तक प्रदर्शन
धर्मांतरण के इस मुद्दे ने अब एक बड़े राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले लिया है। बस्तर के आदिवासी समाज की एक सबसे प्रमुख मांग ‘डीलिस्टिंग’ (Delisting) की है। उनका स्पष्ट कहना है कि जो आदिवासी अपनी मूल संस्कृति और धर्म को छोड़कर दूसरा धर्म अपना चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची से तुरंत बाहर किया जाए और उन्हें मिलने वाले आरक्षण व सरकारी लाभों को बंद किया जाए। इसी डीलिस्टिंग की मांग को लेकर बस्तर संभाग के सातों जिलों से हजारों आदिवासी ग्रामीण हाल ही में दिल्ली पहुंचे और अपना भारी विरोध दर्ज कराया।
सरकार का नया और सख्त धर्मांतरण कानून
बस्तर में बढ़ते धार्मिक विवादों और धर्मांतरण की शिकायतों के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने भी अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। राज्य में अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए एक नया और कठोर कानून लाया गया है। इस नए कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति या संस्था लालच, धोखे या जबरन सामूहिक धर्मांतरण कराती पाई जाती है, तो उसे उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। इसके साथ ही पच्चीस लाख रुपये तक के जुर्माने का भी कड़ा प्रावधान किया गया है। धर्मांतरण से साठ दिन पहले अब प्रशासन को सूचना देना अनिवार्य कर दिया गया है। फिलहाल, बस्तर के कई अंदरूनी इलाकों में तनाव की स्थिति बनी हुई है, जिस पर पुलिस और प्रशासन पैनी नजर रखे हुए हैं।



