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Chhattisgarh Dhai Dhai Saal Politics: कर्नाटक में सत्ता हस्तांतरण से छत्तीसगढ़ में गरमाई सियासत: पुराने जख्म हुए हरे, बीजेपी ने याद दिलाया ‘ढाई-ढाई साल’ का फॉर्मूला

रायपुर। कर्नाटक में कांग्रेस आलाकमान द्वारा ‘ढाई-ढाई साल’ के सत्ता हस्तांतरण (Chhattisgarh Dhai Dhai Saal Politics) फॉर्मूले को लागू करते हुए सिद्धारमैया से इस्तीफा लेकर डीके शिवकुमार को कमान सौंपने के बाद, छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। कर्नाटक के इस बड़े सियासी घटनाक्रम ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस के पुराने जख्मों को फिर से हरा कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के बीच सत्ता बंटवारे को लेकर चले लंबे और कड़वे राजनीतिक संघर्ष की यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं, जिससे प्रदेश का सियासी पारा अचानक चढ़ गया है।

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इस मौके को लपकते हुए कांग्रेस पर जोरदार सियासी हमला बोला है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस आलाकमान की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जो वादा कर्नाटक में निभाया गया, वह छत्तीसगढ़ में टीएस सिंहदेव के साथ क्यों नहीं निभाया गया। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेताओं और जनता के साथ धोखा किया। सत्तारूढ़ दल के प्रवक्ताओं का स्पष्ट कहना है कि कुर्सी के इसी मोह और आंतरिक कलह के कारण ही कांग्रेस को छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा था। कर्नाटक के बहाने भाजपा अब कांग्रेस की गुटबाजी को जनता के सामने फिर से उजागर कर रही है।

दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नेता बैकफुट पर नजर आ रहे हैं और डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि हर राज्य की राजनीतिक परिस्थितियां अलग होती हैं और भाजपा को कांग्रेस के आंतरिक मामलों में दखल देने के बजाय राज्य के सुशासन पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कर्नाटक के घटनाक्रम ने छत्तीसगढ़ भाजपा को बैठे-बिठाए एक बड़ा राजनीतिक हथियार दे दिया है। इस मुद्दे के दोबारा उठने से न सिर्फ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच पुरानी गुटबाजी फिर से सतह पर आ सकती है, बल्कि राज्य की सियासत में आने वाले दिनों में और भी तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

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