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Maruti Lifestyle Raipur: रायपुर की पॉश सोसाइटी में बिल्डर और रहवासियों के बीच विवाद गहराया, पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल

रायपुर की चर्चित रिहायशी सोसाइटी मारुति लाइफस्टाइल (Maruti Lifestyle Raipur) में बिल्डर और रहवासियों के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद अब पुलिस थाने तक पहुँच गया है। सोसाइटी के रहवासियों ने आरोप लगाया है कि बिल्डर द्वारा नियमों के विरुद्ध क्लब हाउस का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है, जबकि बिल्डर पक्ष ने सोसाइटी द्वारा लगाए जा रहे नए बूम गेट पर आपत्ति जताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

मारुति लाइफस्टाइल सोसाइटी का निर्माण अविनाश डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा वर्ष 2012 से 2014 के बीच कराया गया था। लगभग 24 एकड़ क्षेत्र में फैली इस सोसाइटी में कुल 357 मकान हैं। रहवासियों के अनुसार, वर्ष 2019 में सोसाइटी का हैंडओवर मारुति लाइफस्टाइल रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसाइटी को कर दिया गया था, लेकिन कई सुविधाओं और अधूरे कार्यों को लेकर विवाद अब तक जारी है।

क्लब हाउस को लेकर मुख्य विवाद

रहवासियों का कहना है कि सोसाइटी परिसर में बनाया गया क्लब पैरासियो मूल रूप से निवासियों की सामुदायिक सुविधाओं के लिए बनाया गया था। आरोप है कि हैंडओवर के बाद भी क्लब हाउस का नियंत्रण बिल्डर के पास बना हुआ है और उसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है।

रहवासियों के मुताबिक क्लब परिसर में होटल, बार और शादी समारोह जैसी गतिविधियाँ संचालित हो रही हैं, जिससे ध्वनि प्रदूषण और सुरक्षा संबंधी समस्याएँ बढ़ रही हैं। उनका यह भी कहना है कि देर रात तक होने वाली गतिविधियों से सोसाइटी का वातावरण प्रभावित हो रहा है।

इस संबंध में रहवासियों ने सामूहिक हस्ताक्षर अभियान चलाकर कलेक्टर, पुलिस कमिश्नर, नगर निगम, रेरा और अन्य विभागों को लिखित शिकायतें भी भेजी हैं। हालांकि अब तक किसी बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।

बूम गेट लगाने पर बढ़ा विवाद

मामले ने नया मोड़ तब लिया जब सोसाइटी प्रबंधन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से एक नए बूम गेट लगाने का निर्णय लिया। रहवासियों के अनुसार, इसी निर्माण को लेकर बिल्डर पक्ष ने सरस्वती नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई।

इसके बाद पुलिस द्वारा सोसाइटी अध्यक्ष शिव अग्रवाल को थाने बुलाए जाने की सूचना से रहवासियों में नाराज़गी बढ़ गई। देर रात बड़ी संख्या में सोसाइटी के लोग थाने पहुँचे और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।

सूत्रों के अनुसार, थाने में रहवासियों ने यह तर्क रखा कि सोसाइटी का विधिवत हैंडओवर हो चुका है और एक पंजीकृत समिति कार्यरत है, ऐसे में आंतरिक प्रबंधन के मामलों में पुलिस हस्तक्षेप क्यों किया जा रहा है।

पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की भूमिका को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। रहवासियों और कुछ कानूनी जानकारों का कहना है कि मामला मूल रूप से निर्माण, भूमि उपयोग और प्रशासनिक अनुमति से जुड़ा हुआ है, जो नगर निगम और जिला प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आता है।

उनका तर्क है कि यदि बूम गेट या किसी निर्माण को लेकर वैधता का प्रश्न है, तो इसकी जांच और कार्रवाई संबंधित नगरीय निकाय या प्रशासनिक विभाग द्वारा की जानी चाहिए। ऐसे में किसी आपराधिक प्रकरण के अभाव में सीधे पुलिस हस्तक्षेप को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि पुलिस का पक्ष है कि शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित पक्ष को बुलाकर तथ्य जानने की प्रक्रिया सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई का हिस्सा होती है।

बिल्डर पक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इस पूरे मामले में बिल्डर कंपनी की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं रहवासी इस मुद्दे को रेरा और प्रशासनिक स्तर पर आगे ले जाने की तैयारी में हैं।

अब यह विवाद केवल सुविधाओं और प्रबंधन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि बिल्डर, रहवासियों और प्रशासनिक अधिकारों की सीमाओं को लेकर भी बहस का विषय बन गया है।

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