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Rajgami Sampada Nyas: महंत दिग्विजय दास को बताया “कलयुग का राजा बलि”, संत समाज ने जताया सरकार का आभार

रानी सूर्य मुखी देवी राजगामी संपदा न्यास (Rajgami Sampada Nyas) के पदभार ग्रहण समारोह में धर्म स्तंभ काउंसिल के सभापति डॉ सौरव निर्वाणी एवं राम जानकी मंदिर के महंत सुरेंद्र दास शामिल हुए,इस अवसर पर वैष्णव समाज एवं संत समाज ने राजगामी संपदा न्यास में निर्वाणी अखाड़ा एवं निम्बार्क संप्रदाय से जुड़े मनोज़ निर्वाणी को उपाध्यक्ष बनाए जाने पर छत्तीसगढ़ सरकार तथा विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ की रियासतकालीन परंपरा में वैष्णव राजा महंत दिग्विजय दास का योगदान केवल प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए अद्वितीय उदाहरण है,उन्होंने कहा कि निम्बार्क संप्रदाय के महान वैष्णव राजा महंत दिग्विजय दास ने आजादी के बाद अपनी संपूर्ण रियासत का न केवल स्वतंत्र भारत में विलय किया, बल्कि महल, जंगल, भूमि और अपार संपदा को समाज उत्थान एवं लोककल्याण के लिए समर्पित कर दिया।

उन्होंने कहा कि राजनांदगांव रियासत में रायपुर से भी पहले बिजली, पानी की टंकी, रेल लाइन और बीएनसी मिल जैसी व्यवस्थाएं स्थापित होना महंत राजा दिग्विजय दास की दूरदर्शिता, दानशीलता और जनकल्याणकारी सोच का परिणाम था,डॉ. रमन सिंह ने कहा कि ऐसे महापुरुषों की विरासत को आगे बढ़ाना समाज और शासन दोनों की जिम्मेदारी है।

राजगामी संपदा न्यास, जिसकी संपत्ति वर्तमान समय में लगभग 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है, उसमें मनोज निर्वाणी को उपाध्यक्ष बनाए जाने पर संत समाज में विशेष उत्साह देखा गया,विभिन्न अखाड़ों, मंदिरों और वैष्णव संगठनों से जुड़े संत-महंतों ने इसे वैष्णव संप्रदाय की भावनाओं का सम्मान बताया।

धर्म स्तंभ काउंसिल के सभापति डॉ सौरव निर्वाणी ने कहा कि उन्हें आशा है कि महंत दिग्विजय दास की मूल भावना के अनुरूप न्यास की आय एवं संसाधनों का उपयोग लोकहित, सनातन संस्कृति के संवर्धन, धर्म, अध्यात्म, शिक्षा एवं चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा,उन्होंने कहा कि राजगामी संपदा केवल संपत्ति नहीं बल्कि वैष्णव परंपरा की सामाजिक जिम्मेदारी और जनसेवा की जीवंत विरासत है।

अखिल भारतीय पुजारी पुरोहित संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष देव कुमार बालादास ने कहा कि यह वैष्णव समाज के लिए गर्व और प्राकृतिक अधिकार का विषय है,उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने वैष्णव समाज की भावनाओं को समझते हुए संत परंपरा का सम्मान किया है।

राम जानकी मंदिर के महंत सुरेंद्र दास ने कहा कि महंत दिग्विजय दास वैष्णव महंत परंपरा के महान संवाहक थे,वे “पीर पराई जाने रे” की मूल वैष्णव भावना से प्रेरित होकर जीवनभर लोककल्याण में समर्पित रहे,उन्होंने कहा कि उनकी दानशीलता इतिहास में सदैव अनुकरणीय रहेगी और वे वास्तव में “कलयुग के राजा बलि” थे।

समारोह के पश्चात वैष्णव समाज, संत-महंतों एवं विभिन्न धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने मनोज निर्वाणी को शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि राजगामी संपदा न्यास भविष्य में सनातन मूल्यों एवं समाज हित के कार्यों का प्रमुख केंद्र बनेगा,शपथ ग्रहण समारोह स्पीकर हाउस में संपन्न हुआ।

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