World News: UAE ने छोड़ा OPEC, सऊदी अरब से खुली जंग! पाकिस्तान कनेक्शन से मिडिल ईस्ट में भूचाल

UAE Exits OPEC:अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Oil Market) से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने तेल निर्यातक देशों के सबसे बड़े और ताकतवर संगठन ओपेक (OPEC) से आधिकारिक तौर पर बाहर निकलने का ऐलान कर दिया है। यूएई के इस ऐतिहासिक और कड़े कदम ने मिडिल ईस्ट की भू-राजनीति में भारी भूचाल ला दिया है। इस फैसले के पीछे का मुख्य कारण सऊदी अरब (Saudi Arabia) के साथ उनका खुला टकराव और एक नया ‘पाकिस्तान कनेक्शन’ बताया जा रहा है।
सऊदी अरब से खुली बगावत और OPEC से एग्जिट
यूएई और सऊदी अरब के बीच पिछले कुछ समय से तेल उत्पादन के कोटे (Oil Production Quotas) को लेकर तीखा विवाद चल रहा था।
- सऊदी अरब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनाए रखने के लिए उत्पादन में कटौती का दबाव बना रहा था।
- दूसरी तरफ, यूएई अपनी अर्थव्यवस्था को और गति देने के लिए अपना तेल उत्पादन बढ़ाना चाहता था।
- ओपेक की बैठकों में अपनी बात न सुने जाने से नाराज होकर यूएई ने आखिरकार इस संगठन को ही अलविदा कहने का फैसला कर लिया। इस कदम से ओपेक का एकाधिकार और ताकत काफी हद तक कमजोर हो गई है।
विवाद के पीछे का ‘पाकिस्तान नेक्सस’
इस आर्थिक टकराव के पीछे एक बहुत बड़ा रणनीतिक और कूटनीतिक पेंच भी है। राजनयिक सूत्रों के अनुसार, सऊदी अरब और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच हाल ही में बढ़ती रणनीतिक और सैन्य नजदीकियां (Nexus) यूएई को बिल्कुल रास नहीं आ रही हैं।
- यूएई का मानना है कि सऊदी अरब इस क्षेत्र में अपना दबदबा कायम करने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल कर रहा है, जो सीधे तौर पर यूएई के क्षेत्रीय हितों और सुरक्षा प्राथमिकताओं के खिलाफ है।
- यमन युद्ध और अन्य क्षेत्रीय मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच मतभेद पहले ही सतह पर आ चुके थे। अब इस नए नेक्सस ने आग में घी डालने का काम किया है।
वैश्विक तेल बाजार और भारत पर क्या होगा असर?
यूएई के ओपेक से बाहर होने का सीधा मतलब है कि अब वह तेल उत्पादन और कीमतों को लेकर ओपेक के नियमों से बंधा नहीं है। वह स्वतंत्र रूप से जितना चाहे उतना कच्चा तेल बाजार में बेच सकता है।
- इससे आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Prices) में भारी अस्थिरता देखने को मिल सकती है।
- अगर यूएई उत्पादन बढ़ाता है, तो तेल के दाम गिर सकते हैं, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए 1 बड़ी राहत की खबर साबित हो सकती है।
हालांकि, मिडिल ईस्ट में दो बड़े सुन्नी इस्लामी देशों के बीच यह खुली जंग भविष्य में क्या भू-राजनीतिक गुल खिलाएगी, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।



