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Sakti Vedanta Blast पर गरमाई सियासत: कांग्रेस ने बताया हत्या, मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ मुआवजे की मांग

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक औद्योगिक दुर्घटना में अब तक 19 बेगुनाह मजदूरों की जान जा चुकी है। इसके अलावा कई अन्य श्रमिक गंभीर रूप से घायल हैं, जो अलग-अलग अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।

इस महात्रासदी के बाद अब प्रदेश का राजनीतिक माहौल भी पूरी तरह से गरमा गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस घटना को लेकर आक्रामक रुख अपनाते हुए सरकार और कंपनी प्रबंधन पर तीखा हमला बोला है।

कांग्रेस का आक्रामक रुख: साधारण हादसा नहीं, हत्या

विपक्ष ने इस पूरी घटना को गंभीर प्रशासनिक और कॉर्पोरेट लापरवाही का परिणाम बताया है।

  • प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे एक साधारण हादसा मानने से इनकार कर दिया है।
  • उन्होंने साफ शब्दों में इस त्रासदी को ‘हत्या’ करार दिया है।
  • इसके अलावा, दीपक बैज ने राज्य सरकार और कंपनी प्रबंधन से मांग की है कि मृतकों के पीड़ित परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा तत्काल प्रभाव से दिया जाए।

टीएस सिंहदेव और रामकुमार यादव के गंभीर आरोप

कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी वेदांता प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

  • पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने हादसे के पीछे के कारणों की गहराई से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा नहीं है?
  • उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि इतने बड़े पावर प्लांट में एंबुलेंस जैसी बुनियादी और आपातकालीन सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं थीं, जो सीधे तौर पर श्रमिकों की सुरक्षा से खिलवाड़ है।
  • वहीं, चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक रामकुमार यादव ने प्लांट की तकनीकी खामियों को उजागर किया। उनका साफ कहना है कि प्लांट को शुरू करने से पहले मशीनों का सही तरीके से मेंटेनेंस नहीं किया गया और मुनाफे के लिए उनकी क्षमता से अधिक उपयोग किया गया।

कंपनी प्रबंधन पर एफआईआर की मांग

कोरबा लोकसभा क्षेत्र की सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने भी कंपनी प्रबंधन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।

  • उन्होंने कहा कि यह दर्दनाक हादसा सुरक्षा मानकों की लगातार हो रही अनदेखी का ही सीधा परिणाम है।
  • उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले भी वेदांता के अन्य संयंत्रों में ऐसे जानलेवा हादसे हो चुके हैं, लेकिन कंपनी ने सुधार के लिए कभी पर्याप्त कदम नहीं उठाए।
  • सांसद ने राज्य सरकार और प्रशासन से मांग की है कि स्वास्थ्य और सुरक्षा विभाग के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो और दोषी कंपनी प्रबंधन के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

इस हादसे में जान गंवाने वाले ज्यादातर मजदूर बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे। इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले गरीब मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है।

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