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Chhattisgarh UCC Row: विष्णु देव साय सरकार के UCC कमेटी बनाने पर गरमाई सियासत, कांग्रेस-BJP में वार-पलटवार

छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड – UCC) का प्रारूप तैयार करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति के गठन के फैसले के साथ ही राज्य की सियासत पूरी तरह से गरमा गई है। इस फैसले को लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। दोनों ही दल आदिवासी अधिकारों और तुष्टिकरण के मुद्दे पर एक-दूसरे को घेर रहे हैं।

कांग्रेस का हमला: आदिवासियों के अधिकारों पर डाका

कैबिनेट के फैसले के तुरंत बाद कांग्रेस ने सरकार पर तीखा प्रहार किया है। पीसीसी मीडिया चेयरमैन सुशील आनंद शुक्ला ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे आदिवासियों के खिलाफ बताया है।

  • कांग्रेस का आरोप है कि UCC लागू करके बीजेपी सरकार छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों पर डाका डालना चाहती है।
  • सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए पेसा (PESA) कानून लागू है।
  • उनका तर्क है कि राज्य में 5वीं अनुसूची लागू होने के बाद यहां यूसीसी थोपने का कोई औचित्य ही नहीं बनता।

बीजेपी का पलटवार: कांग्रेस कर रही है तुष्टिकरण की राजनीति

यूसीसी पर कांग्रेस के तीखे वार के बाद बीजेपी ने भी जोरदार पलटवार किया है। बीजेपी प्रवक्ता अनुराग अग्रवाल ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

  • अनुराग अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने UCC का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए उसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई को जिम्मेदारी सौंपी है, जिन्होंने उत्तराखंड का UCC ड्राफ्ट तैयार किया था।
  • बीजेपी प्रवक्ता ने बताया कि उत्तराखंड के ड्राफ्ट में यह बिल्कुल स्पष्ट है कि आदिवासी समुदाय और उनकी संस्कृति को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।
  • उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी पुरानी तुष्टिकरण की राजनीति के तहत छद्म रूप से आदिवासियों का नाम लेकर दरअसल एक समुदाय विशेष के हितों की बात कर रही है।

राज्य सरकार का मानना है कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में अलग-अलग कानूनों की जटिलता को खत्म करने के लिए UCC जरूरी है, जिससे न्याय प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी और महिलाओं को समान अधिकार मिलेंगे। लेकिन विधानसभा में इस ड्राफ्ट के पहुंचने से पहले ही सड़क पर संग्राम शुरू हो चुका है।

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