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Annu Kapoor Bollywood Journey: 1987 में ‘मिस्टर इंडिया’ से चमके, अक्षय कुमार को भी दी कड़ी टक्कर

हिंदी सिनेमा में कई ऐसे चेहरे हैं जो अपनी बेहतरीन अदाकारी से दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं। इनमें से एक नाम अन्नू कपूर का है। Annu Kapoor Bollywood Journey (अन्नू कपूर का बॉलीवुड सफर) अभिनय की दुनिया में एक शानदार मिसाल है। उनकी दमदार आवाज और हर किरदार में ढल जाने की कला उन्हें बाकी कलाकारों से एकदम अलग बनाती है।

दरअसल अन्नू कपूर को पहचान दिलाने में 1987 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ का बहुत बड़ा हाथ रहा है। शेखर कपूर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उन्होंने एक क्रोधी अखबार संपादक ‘मिस्टर गायतोंडे’ का शानदार किरदार निभाया था।

1987 की ‘मिस्टर इंडिया’ ने रातों-रात बनाया स्टार

‘मिस्टर इंडिया’ में अनिल कपूर और श्रीदेवी मुख्य भूमिका में थे। हालांकि इस फिल्म में अन्नू कपूर का रोल बहुत लंबा नहीं था, लेकिन उनकी गजब की कॉमेडी और डायलॉग डिलीवरी ने दर्शकों को खूब हंसाया।

इसके अलावा फिल्म में रिंगिंग टेलीफोन से बार-बार परेशान होने वाले उनके सीन आज भी लोगों को गुदगुदाते हैं। इसी फिल्म ने बॉलीवुड में उनकी एक मजबूत जमीन तैयार की थी, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ते गए।

अक्षय कुमार को दी कड़ी टक्कर

अन्नू कपूर सिर्फ कॉमेडी ही नहीं बल्कि बेहद गंभीर किरदारों में भी जान फूंक देते हैं। इसका सबसे बड़ा और ताजा उदाहरण फिल्म ‘जॉली एलएलबी 2’ में देखने को मिला था।

इस फिल्म में उन्होंने एक बेहद चालाक, रसूखदार और घमंडी वकील ‘प्रमोद माथुर’ का किरदार निभाया था। कोर्ट रूम के तनावपूर्ण दृश्यों में उन्होंने सुपरस्टार अक्षय कुमार को अभिनय के मोर्चे पर कड़ी टक्कर दी थी। इसके परिणामस्वरूप दर्शकों और समीक्षकों ने एक सुर में माना था कि कुछ दृश्यों में अन्नू कपूर की एक्टिंग अक्षय कुमार से भी भारी पड़ी थी।

Annu Kapoor Bollywood Journey के अन्य अहम पड़ाव

अन्नू कपूर ने ‘विकी डोनर’ में डॉ. बलदेव चड्ढा का यादगार रोल निभाकर प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीता था। उनके पास 4 दशकों से अधिक का विशाल अनुभव है और उन्होंने रेडियो पर भी अपनी एक खास पहचान बनाई है।

हर फिल्म में उनका किरदार इतना वास्तविक होता है कि दर्शक उन्हें सिर्फ एक एक्टर नहीं, बल्कि उस किरदार के रूप में ही याद रखते हैं। उनकी यह विविधता और कला के प्रति समर्पण ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

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