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Women Reservation Bill: लोकसभा में होंगी 850 सीटें! जानिए आर्टिकल 81 में बदलाव क्यों है जरूरी?

भारतीय राजनीति की रूपरेखा बहुत जल्द एक बड़े बदलाव की गवाह बनने वाली है। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने वाले Women Reservation Bill (महिला आरक्षण कानून) को वर्ष 2029 के आम चुनावों से लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों का एक विशेष सत्र बुलाया गया है, ताकि इस ऐतिहासिक कदम को अमलीजामा पहनाया जा सके। लेकिन इस आरक्षण को लागू करने से पहले संविधान के कई अहम अनुच्छेदों में बदलाव करना बेहद जरूरी है, जिनमें सबसे प्रमुख है आर्टिकल 81।

आर्टिकल 81 में संशोधन क्यों है जरूरी?

महिला आरक्षण को जमीन पर उतारने के लिए सबसे अहम संशोधन संविधान के अनुच्छेद 81 में किया जाना है।

  • दरअसल, इसी अनुच्छेद में लोकसभा की सदस्य संख्या (सांसदों की संख्या) को लेकर कानूनी प्रावधान तय किए गए हैं।
  • मौजूदा समय में आर्टिकल 81 के मुताबिक, लोकसभा सदस्यों की कुल संख्या अधिकतम 552 हो सकती है, जिनमें से 550 निर्वाचित और 2 ऐंग्लो-इंडियन होते हैं।
  • अब सरकार इसी अनुच्छेद में संशोधन का प्रस्ताव ला रही है, जिसके तहत लोकसभा में सांसदों की अधिकतम संख्या को बढ़ाकर 850 तक किया जाएगा।

850 सांसदों का क्या होगा समीकरण?

सरकारी सूत्रों और अब तक मिली जानकारी के अनुसार, परिसीमन के बाद फिलहाल 816 निर्वाचित सांसद ही सदन में बैठेंगे, लेकिन भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसकी अधिकतम सीमा 850 तय की जा रही है।

  • इस नई व्यवस्था में यह लिमिट तय की जाएगी कि 850 में से अधिकतम 815 सीटें राज्यों के पास रहेंगी।
  • वहीं, 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों (Union Territories) के लिए आरक्षित की जाएंगी।
  • आर्टिकल 81 के अलावा संविधान के अनुच्छेद 55, 82, 170, 330, 332 और 334A में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए जाएंगे। इन सभी अनुच्छेदों में संशोधन के बाद ही महिला आरक्षण के हर छोटे-बड़े प्रावधान को पूरी तरह से लागू किया जा सकेगा।

रोटेशन सिस्टम से दिग्गजों की बढ़ेगी टेंशन

इस पूरे परिसीमन और आरक्षण प्रक्रिया का एक सबसे दिलचस्प और प्रभावकारी पहलू ‘सीटों का रोटेशन’ है।

  • जानकारी मिल रही है कि महिला आरक्षण वाली सीटों को रोटेट किया जाएगा। किसी एक विशेष सीट को 15 सालों (लगातार 3 चुनाव) के लिए महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा और उसके बाद उसमें बदलाव कर दिया जाएगा।
  • उदाहरण के तौर पर, परिसीमन के बाद अगर उत्तर प्रदेश (UP) में लोकसभा की कुल 120 सीटें हो जाती हैं, तो उनमें से 40 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी। यदि गाजियाबाद की सीट महिला कोटे में जाती है, तो वह 15 साल तक आरक्षित रहेगी और फिर यह आरक्षण पास की अमरोहा या मेरठ सीट पर शिफ्ट हो जाएगा।
  • वहीं, दिल्ली में लोकसभा की कुल 11 सीटें होने का अनुमान है, जिनमें से 4 सांसद महिलाएं होंगी।

इस रोटेशन प्रणाली से उन दिग्गज पुरुष नेताओं की परेशानी काफी बढ़ सकती है, जो बीते कई कार्यकालों से किसी एक सीट पर लगातार जीतते आ रहे हैं और उसे अपना अजेय गढ़ मान चुके हैं।

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