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Chhattisgarh Chital Hunting: कुत्तों से बचाकर ग्रामीणों ने ही कर लिया चीतल का शिकार, 5 गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से इंसानियत और वन्यजीवों की सुरक्षा को शर्मसार कर देने वाला एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां कुछ ग्रामीणों ने जंगल से भटककर गांव में आए एक प्यासे चीतल को पहले तो आवारा कुत्तों के हमले से बचाया, लेकिन फिर इंसानियत भूलकर खुद ही उस बेजुबान जानवर का शिकार कर लिया। इस मामले में वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 5 ग्रामीणों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

कुत्तों के हमले के बाद ग्रामीणों ने किया शिकार

यह पूरी घटना रायगढ़ वन मंडल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले देलारी गांव की है, जो शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 16 अप्रैल की दोपहर को जंगल से भटककर एक चीतल पानी की तलाश में गांव के करीब एक तालाब के पास पहुंच गया था। इसी दौरान आवारा कुत्तों के एक झुंड ने उस बेजुबान पर हमला कर दिया। वहां मौजूद कुछ लोगों ने शुरुआत में चीतल को कुत्तों से तो बचा लिया, लेकिन इसके बाद उनकी नीयत डोल गई। आत्माराम राठिया, मयाराम राठिया, हरिचरण साव, तरूण साव और मोतीलाल अगरिया नामक 5 ग्रामीणों ने मिलकर चीतल का शिकार कर लिया और तालाब के पास ही उसके मांस का बंटवारा कर लिया।

वन विभाग की छापामारी और गिरफ्तारी

जब इस क्रूर कृत्य की भनक वन विभाग को लगी, तो वन अमले ने बिना समय गंवाए देलारी गांव में दबिश दी।

वन विभाग की टीम ने संदेह के आधार पर इन 5 ग्रामीणों के घरों में छापामार कार्रवाई की। तलाशी के दौरान आरोपियों के घरों से पकाया हुआ मांस (सब्जी) जब्त किया गया। जब वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों से कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया। हालांकि, आरोपियों ने अपने बचाव में यह तर्क दिया कि कुत्तों के हमले से चीतल की मौत पहले ही हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने मांस का बंटवारा कर लिया।

वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई

वन विभाग ने इस कृत्य को बेहद गंभीरता से लिया है। भारत में वन्यजीवों के शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध है।

सभी 5 आरोपितों के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की गई है। वन विभाग ने धारा 39, 50 और 51 के तहत अपराध दर्ज करते हुए सभी आरोपितों को विधिवत गिरफ्तार किया। इसके बाद उन्हें संबंधित न्यायालय में पेश किया गया, जहां से अदालत ने इस क्रूर कृत्य के लिए सभी 5 आरोपियों को जेल भेज दिया है। यह घटना वन्यजीवों के प्रति ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और संवेदनहीनता का एक बड़ा उदाहरण है।

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