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West Bengal Political Crisis: ममता बनर्जी से छिन जाएगा TMC का नाम और सिंबल? 50 विधायकों के बगावत की अटकलें, शिवसेना-NCP जैसा खेल!

Will Mamata Banerjee lose TMC name and symbol:पश्चिम बंगाल (West Bengal) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के कैबिनेट विस्तार के बाद राज्य की राजनीति में एक और अभूतपूर्व भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें (Speculations) बेहद तेज हो गई हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में एक बहुत बड़ी टूट होने वाली है। दावा किया जा रहा है कि टीएमसी के लगभग 50 विधायक पाला बदलकर अलग गुट बना सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो महाराष्ट्र के शिवसेना और एनसीपी विवाद की तरह ममता बनर्जी के हाथ से उनकी अपनी खड़ी की हुई पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह (जोड़ा फूल) भी छिन सकता है।

क्या है 50 विधायकों की बगावत का पूरा गणित?

हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था और पार्टी महज 80 सीटों पर सिमट गई थी।

  • दलबदल कानून से बचने का नियम: संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत किसी भी पार्टी के विधायकों को अपनी सदस्यता बचाते हुए अलग गुट बनाने या किसी अन्य दल में विलय करने के लिए कम से कम दो-तिहाई (2/3) विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है।
  • TMC में आंकड़े का खेल: टीएमसी के पास वर्तमान में 80 विधायक हैं, जिसका दो-तिहाई आंकड़ा 54 विधायक होता है। सूत्रों का दावा है कि लगभग 50 से 55 विधायक इस वक्त पार्टी नेतृत्व और विशेषकर अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली से नाराज चल रहे हैं और वे लगातार भाजपा खेमे या एक नए स्वतंत्र गुट के संपर्क में हैं।

पार्टी के नाम और सिंबल पर कैसे मडराया खतरा?

यदि नाराज विधायकों की संख्या 54 या उससे पार हो जाती है, तो यह गुट खुद को ‘असली तृणमूल कांग्रेस’ घोषित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) का दरवाजा खटखटा सकता है।

  • महाराष्ट्र जैसा घटनाक्रम: चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, यदि किसी पार्टी का बहुमत (विधायकों और सांसदों की संख्या) मूल नेतृत्व के खिलाफ चला जाता है, तो विधायी बहुमत के आधार पर पार्टी के नाम और सिंबल पर उस बागी गुट का दावा मजबूत हो जाता है। महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे (शिवसेना) और अजीत पवार (NCP) के मामलों में सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग ने इसी विधायी बहुमत को आधार मानकर फैसला सुनाया था।
  • अल्पमत में आ जाएगा ममता गुट: यदि बागी धड़ा चुनाव आयोग में अपना बहुमत साबित करने में सफल रहता है, तो ममता बनर्जी को अपनी ही बनाई पार्टी से हाथ धोना पड़ सकता है और उन्हें एक नए नाम व नए सिंबल के साथ नए सिरे से शुरुआत करनी होगी।

भाजपा खेमे की हलचल और टीएमसी का रुख

सोमवार को शुभेंदु अधिकारी की कैबिनेट में 35 नए मंत्रियों के शामिल होने के बाद से ही विपक्षी खेमे में भारी मायूसी और असंतोष देखा जा रहा है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के कई बड़े नेता अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सत्ताधारी दल की तरफ रुख कर रहे हैं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इन सभी खबरों को पूरी तरह से कोरी अफवाह और भाजपा का दुष्प्रचार करार दिया है। टीएमसी प्रवक्ताओं का कहना है कि पार्टी के सभी विधायक पूरी एकजुटता के साथ ममता बनर्जी के नेतृत्व में खड़े हैं और बंगाल की जनता के हक के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

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