Ahmedabad Blast Case: 2008 सीरियल ब्लास्ट पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 38 आतंकियों की फांसी और 11 की उम्रकैद बरकरार

National News (Ahmedabad): साल 2008 में पूरे देश को दहला देने वाले ‘अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट’ (Ahmedabad Blast Case) मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने मंगलवार (7 जुलाई) को एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले को पूरी तरह से बरकरार रखा है, जिसमें 38 दोषियों को फांसी की सजा और 11 अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। अदालत ने दोषियों की ओर से अपनी सजा कम कराने के लिए दायर की गई सभी अपीलों को सिरे से खारिज कर दिया है।
खबर की मुख्य बातें (Highlights)
- 38 को फांसी, 11 को उम्रकैद: गुजरात हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दी गई 49 दोषियों की सजा पर मुहर लगा दी है।
- पीड़ितों को मुआवजा: अदालत ने बम विस्फोटों में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
- सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता खुला: 16 साल बाद आए इस फैसले के बाद, अब दोषियों के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का आखिरी कानूनी विकल्प बचा है।
- विशेष बेंच ने की सुनवाई: इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने मार्च 2025 से एक विशेष बेंच के जरिए नियमित सुनवाई की थी।
निचली अदालत के फैसले पर लगी न्यायिक मुहर
दरअसल, अहमदाबाद की विशेष अदालत (Trial Court) ने 18 फरवरी 2022 को इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 38 दोषियों को मौत की सजा (फांसी) और 11 अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
भारतीय कानून के सख्त नियमों के अनुसार, किसी भी निचली अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा तब तक लागू नहीं की जा सकती, जब तक संबंधित राज्य का हाईकोर्ट उसकी पुष्टि न कर दे। इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत यह Ahmedabad Blast Case गुजरात हाईकोर्ट में विचाराधीन था। राज्य सरकार ने भी फांसी की पुष्टि करने के लिए याचिका दाखिल की थी।
क्या हुआ था 26 जुलाई 2008 को?
26 जुलाई 2008 का दिन गुजरात और पूरे देश के लिए एक ‘काले दिन’ के रूप में याद किया जाता है। गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में महज कुछ ही मिनटों के अंतराल (गैप) पर एक के बाद एक कई सिलसिलेवार बम धमाके (Serial Blasts) हुए थे।
- 50 से ज्यादा की मौत: इन धमाकों में 50 से अधिक मासूम लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी, जबकि 200 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
- भीड़भाड़ वाले इलाके थे निशाना: आतंकवादियों ने जानबूझकर बाजारों, बसों, अस्पतालों और भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाया था, ताकि ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा सके।
लंबी जांच और सालों चली सुनवाई के बाद जांच एजेंसियों ने इसे देश के सबसे बड़े और खौफनाक आतंकी हमलों में से एक माना था। अब 16 साल बाद गुजरात हाईकोर्ट के इस फैसले ने आतंकी हमले के पीड़ितों के परिजनों को एक बड़ी राहत दी है।






