Rupee vs Dollar: अमेरिका-ईरान जंग रुकने के बाद भी 99 तक गिरेगा रुपया, BofA के राहुल बाजोरिया की बड़ी चेतावनी

Rupee will fall to 99 level:नई दिल्ली/मुंबई। मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की खबरों से भले ही दुनिया को थोड़ी राहत मिली हो, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) के लिए चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) सिक्योरिटीज के प्रमुख अर्थशास्त्री राहुल बाजोरिया ने भारतीय रुपये को लेकर एक बड़ी और चिंताजनक चेतावनी दी है। बाजोरिया के अनुसार, युद्ध रुकने के बावजूद भारतीय रुपया (Indian Rupee) लगातार दबाव में रहेगा और डॉलर के मुकाबले टूटकर 99 रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर (Record Low) तक पहुंच सकता है।
‘एम्बेडेड इन्फ्लेशन साइकिल’ और राजकोषीय घाटा
राहुल बाजोरिया ने स्पष्ट किया है कि भारत इस वक्त एक ‘एम्बेडेड इन्फ्लेशन साइकिल’ (Embedded Inflation Cycle) से गुजर रहा है। इसका मुख्य कारण मिडिल ईस्ट के लंबे तनाव से पैदा हुआ ‘टर्म्स ऑफ ट्रेड शॉक’ है, जिसने कीमतों और बाहरी फाइनेंसिंग दोनों को एक साथ बुरी तरह प्रभावित किया है।
- बाजोरिया का कहना है कि मिडिल ईस्ट में अस्थिरता के कारण साल 2026 में भारत का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) बढ़कर जीडीपी के 5% तक पहुंच गया है।
- फर्टिलाइजर सब्सिडी में भारी इजाफा, ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती और टैक्स कलेक्शन में नरमी के कारण यह घाटा तेजी से बढ़ा है।
- उनका मानना है कि अगर युद्ध कल ही खत्म हो जाता है, तब भी मैक्रोइकोनॉमिक माहौल को स्थिर करने के लिए भारत को ईंधन की कीमतों में बड़े बदलाव करने ही पड़ेंगे।
आयात होगा महंगा, आम आदमी की जेब पर सीधा असर
रुपये के 99 के स्तर तक गिरने का सबसे सीधा और बड़ा असर आम आदमी की जेब और व्यापारिक घरानों पर पड़ेगा। रुपया कमजोर होने से भारत के लिए विदेशों से सामान मंगाना बेहद महंगा हो जाएगा। खासकर कच्चे तेल (Crude Oil) का आयात, जो भारत की सबसे बड़ी जरूरत है, बहुत अधिक महंगा हो जाएगा। महंगे कच्चे तेल का सीधा मतलब है पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल, जो ट्रांसपोर्टेशन की लागत को बढ़ाएगा और अंततः रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं को और अधिक महंगा कर देगा। इससे निचले और मध्यम आय वाले वर्गों का घरेलू बजट बुरी तरह चरमरा सकता है।
रिजर्व बैंक के प्रयास और संरचनात्मक चुनौतियां
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये की इस तेज गिरावट को रोकने और बाजार को स्थिर करने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं, लेकिन 99 तक रुपये के पहुंचने का अनुमान यह दर्शाता है कि ये दबाव आसानी से खत्म होने वाले नहीं हैं। विदेशी पूंजी की निकासी और लगातार तीसरे वर्ष बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (Balance of Payments) का घाटे में रहना यह साबित करता है कि भारतीय पूंजी खाते में कुछ संरचनात्मक कमजोरियां (Structural Weaknesses) हैं। बाजोरिया का साफ संदेश है कि भले ही भू-राजनीतिक हालात सुधर जाएं, लेकिन अर्थव्यवस्था की इन अंदरूनी चुनौतियों से पार पाने में लंबा समय और कड़े आर्थिक फैसले लगेंगे।



