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Sonam Wangchuk Education: 9 साल तक नहीं देखा स्कूल, फिर NIT से की इंजीनियरिंग और फ्रांस में की पढ़ाई; जानिए कितने पढ़े-लिखे हैं ‘3 इडियट्स’ के असली ‘रैंचो’

Sonam Wangchuk Education: बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्म ‘3 इडियट्स‘ (3 Idiots) के फुंसुख वांगडू (रैंचो) तो आपको याद ही होंगे? यह किरदार असल जिंदगी में लद्दाख के मशहूर इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और इनोवेटर सोनम वांगचुक से ही प्रेरित है। आज सोनम वांगचुक अपनी अनोखी सोच और इनोवेशन के चलते देश के लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुके हैं।

अगर बात Sonam Wangchuk Education (सोनम वांगचुक की पढ़ाई-लिखाई) की करें, तो उनका सफर बेहद हैरान करने वाला रहा है। एक छोटे से गांव से निकलकर NIT श्रीनगर और फिर फ्रांस तक का उनका सफर यह साबित करता है कि शिक्षा सिर्फ चार दीवारी तक सीमित नहीं होती। आइए जानते हैं वे कितने पढ़े-लिखे हैं।

खबर की मुख्य बातें (Highlights)

  • शुरुआती पढ़ाई: 9 साल की उम्र तक किसी स्कूल का मुंह नहीं देखा, मां ने घर पर ही पढ़ाया।
  • स्कूली शिक्षा: बड़े शहर में आने के बाद दिल्ली के स्पेशल केंद्रीय विद्यालय में लिया एडमिशन।
  • इंजीनियरिंग: NIT श्रीनगर (तब रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में BTech की डिग्री।
  • विदेशी पढ़ाई: फ्रांस से पर्यावरण के अनुकूल ‘अर्थन आर्किटेक्चर’ की खास पढ़ाई की।

9 साल की उम्र तक नहीं गए स्कूल, मां ने घर पर ही पढ़ाया

सोनम वांगचुक का जन्म साल 1966 में लद्दाख के अलची के पास एक बेहद दूरदराज और छोटे से गांव में हुआ था। उस दौर में उनके गांव और आसपास कोई स्कूल नहीं हुआ करता था।

यही वजह रही कि वांगचुक ने 9 साल की उम्र तक किसी भी स्कूल में कदम नहीं रखा। उनकी शुरुआती शिक्षा उनकी मां ने घर पर ही रहकर मातृभाषा में कराई। अपनी मां से ही उन्होंने बुनियादी शिक्षा और पढ़ना-लिखना सीखा।

Sonam Wangchuk Education: दिल्ली के स्कूल से NIT श्रीनगर तक का सफर

बाद में जब उनके पिता सार्वजनिक जीवन (राजनीति/समाज सेवा) से जुड़े, तो उनके परिवार का संपर्क बड़े शहरों से हुआ। इसके बाद सोनम वांगचुक का एडमिशन दिल्ली के एक स्पेशल केंद्रीय विद्यालय (Kendriya Vidyalaya) में कराया गया। दिल्ली के इस स्कूल ने उनके जीवन और आगे की पढ़ाई की एक मजबूत नींव रखी।

शिक्षा का स्तर (Education Level)संस्थान का नाम (Institute Name)विषय/डिग्री (Degree)
स्कूली शिक्षाकेंद्रीय विद्यालय, नई दिल्लीस्कूली पढ़ाई पूरी की
ग्रेजुएशन (1987)NIT श्रीनगर (तत्कालीन रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज)BTech (मैकेनिकल इंजीनियरिंग)
हायर एजुकेशनक्रेटेरे स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर (ग्रेनोबल, फ्रांस)अर्थन आर्किटेक्चर (Earthen Architecture)

स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने उस समय के प्रतिष्ठित ‘रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज, श्रीनगर’ (जिसे आज NIT Srinagar के नाम से जाना जाता है) में दाखिला लिया। साल 1987 में उन्होंने यहां से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में BTech की डिग्री हासिल की।

हायर एजुकेशन के लिए गए फ्रांस, सीखी घर बनाने की खास तकनीक

इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद सोनम वांगचुक अपनी पढ़ाई को और आगे ले गए। वे हायर एजुकेशन के लिए फ्रांस चले गए।

फ्रांस के ‘क्रेटेरे स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर’ (ग्रेनोबल) से उन्होंने अर्थन आर्किटेक्चर (Earthen Architecture) का कोर्स किया। इस खास कोर्स में उन्होंने ऐसे घर बनाने की तकनीक सीखी, जो पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly) हों और पहाड़ी क्षेत्रों के कठिन मौसम की जरूरतों को पूरा कर सकें।

पढ़ाई को समाज से जोड़ा; किए ये 3 बड़े इनोवेशन

सोनम वांगचुक का हमेशा से यह मानना रहा है कि शिक्षा सिर्फ किताबों में कैद नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसका सीधा इस्तेमाल समाज की समस्याओं को सुलझाने में होना चाहिए। अपनी इसी सोच और इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दम पर उन्होंने कई बड़े काम किए:

  1. SECMOL की स्थापना: साल 1988 में उन्होंने स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) की स्थापना की, जिसने लद्दाख के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारा।
  2. आइस स्तूप (Ice Stupa): इंजीनियरिंग का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए उन्होंने ‘आइस स्तूप’ की तकनीक विकसित की। यह तकनीक सर्दियों में बर्फ के रूप में पानी को स्टोर करती है, जो गर्मियों में किसानों के काम आती है।
  3. HIAL यूनिवर्सिटी: उन्होंने ‘हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख’ (HIAL) की सह-स्थापना की है, जहां रटने की बजाय छात्रों को ‘एक्सपीरियंस बेस्ड एजुकेशन’ (Experience-based education) देने पर जोर दिया जाता है।

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