Devendra Yadav High Court: भिलाई विधायक को बड़ा झटका; चुनाव में जानकारी छिपाने के मामले पर होगी विस्तृत सुनवाई, गवाह भी बुलाए जाएंगे

State News (Bilaspur): छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (Devendra Yadav High Court) ने भिलाई नगर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव को एक बड़ा कानूनी झटका दिया है।
हाईकोर्ट ने विधायक की ओर से दायर उस आवेदन को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने मामले को ‘प्रारंभिक मुद्दा’ मानते हुए बिना गवाहों और विस्तृत सुनवाई के जल्द निपटाने (खारिज करने) की मांग की थी। न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनावी कदाचार (भ्रष्टाचार) और जानकारियां छिपाने जैसे गंभीर आरोपों का फैसला सिर्फ दस्तावेजों के आधार पर नहीं हो सकता, इसके लिए गवाहों और साक्ष्यों की जांच जरूरी है।
खबर की मुख्य बातें (Devendra Yadav High Court)
- देवेंद्र यादव को झटका: हाईकोर्ट ने विधायक की याचिका जल्द निपटाने की अपील खारिज की।
- किसने की है शिकायत: भाजपा नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय ने चुनाव याचिका दायर की है।
- क्या है आरोप: नामांकन में आय, संपत्ति और आपराधिक मामलों की सही जानकारी न देने का आरोप।
- अगली सुनवाई: अब इस मामले पर 4 अगस्त 2026 को गवाहों और सबूतों के साथ विस्तृत सुनवाई होगी।
चुनाव याचिका में क्या लगाए गए हैं गंभीर आरोप?
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा के दिग्गज नेता प्रेम प्रकाश पांडेय ने वर्ष 2024 में चुनाव याचिका दायर कर देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती दी थी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि विधायक ने अपने नामांकन पत्र (Affidavit) में अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स, आय, संपत्ति और लंबित आपराधिक मामलों से जुड़ी अनिवार्य जानकारियां पूरी तरह से उजागर नहीं कीं। याचिकाकर्ता का दावा है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत यह सीधा-सीधा ‘चुनावी कदाचार’ और ‘भ्रष्ट आचरण’ की श्रेणी में आता है।
विधायक देवेंद्र यादव की दलील क्या थी?
विधायक देवेंद्र यादव की ओर से अधिवक्ता बी.पी. शर्मा ने अदालत में अर्जी लगाई थी। उन्होंने मांग की थी कि प्रेम प्रकाश पांडेय की चुनाव याचिका अनिवार्य शर्तों को पूरा नहीं करती है।
विधायक की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने अपने हलफनामे में आपराधिक मामलों सहित सभी जानकारियां पूरी पारदर्शिता के साथ दी थीं। इसलिए बिना गवाहों की जांच के, सिर्फ कानूनी आधार पर ही इस चुनाव याचिका को शुरुआत में ही खारिज कर दिया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की विधायक की दलील?
याचिकाकर्ता प्रेम प्रकाश पांडेय के वकीलों (डॉ. निर्मल शुक्ला और सुश्री प्रिया मिश्रा) ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देकर विधायक की इस मांग का कड़ा विरोध किया।
न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ (Devendra Yadav High Court) ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विधायक देवेंद्र यादव का आवेदन खारिज कर दिया। अदालत ने कहा:
- प्रारंभिक मुद्दों पर फैसला तभी हो सकता है जब तथ्य निर्विवाद हों।
- यहां दोनों पक्षों के बीच तथ्यों को लेकर सीधा विवाद है।
- याचिकाकर्ता को साबित करना है कि विधायक ने जानकारियां छिपाईं, और विधायक को साबित करना है कि उन्होंने सही जानकारी दी थी।
- ऐसे विवादों का निपटारा सिर्फ गवाहों की गवाही और सबूतों के मूल्यांकन के बाद ही संभव है।
अब 4 अगस्त 2026 को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट द्वारा आवेदन खारिज किए जाने के बाद अब भिलाई विधायक की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस चुनाव याचिका पर अब नियमित और विस्तृत सुनवाई होगी। इस दौरान दोनों पक्षों को अपने-अपने गवाह और पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्य (सबूत) अदालत के सामने पेश करने होंगे। न्यायालय ने इस अहम मामले की अगली सुनवाई के लिए 4 अगस्त 2026 की तारीख तय की है।






