Gaurav Gera Struggle Story: कभी बैंक खाते में बचे थे सिर्फ 84 रुपये, काम के लिए बैंक के सामने सिर झुकाते थे ‘धुरंधर मोहम्मद आलम’ उर्फ गौरव गेरा

Gaurav Gera Struggle Story:मायानगरी मुंबई (Mumbai) में हर दिन हजारों लोग अपनी आंखों में एक्टर बनने का सपना लेकर आते हैं, लेकिन सफलता उसी को मिलती है जो कठिन संघर्ष की भट्टी में तपकर निकलता है। आज अपने कॉमेडी वीडियोज ‘चुटकी और शॉपकीपर’ (Chutki and Shopkeeper) और टीवी के मशहूर किरदारों से घर-घर में अपनी पहचान बना चुके अभिनेता गौरव गेरा (Gaurav Gera) का सफर भी कुछ ऐसा ही रहा है। ‘धुरंधर मोहम्मद आलम’ और ‘जस्सी जैसी कोई नहीं’ के नंदू के रूप में मशहूर गौरव गेरा ने हाल ही में अपने उन स्ट्रगल के दिनों (Struggle Story) का खुलासा किया है, जब उनके पास खाने तक के पैसे नहीं बचे थे।
बैंक खाते में बचे थे महज 84 रुपये
गौरव गेरा ने बताया कि जब वे शुरुआत में मुंबई आए थे, तब उन्हें काफी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा था। उनके पास काम नहीं था और जेब खाली रहती थी।
- तंगी का वो दौर: एक ऐसा भी वक्त आया जब मुंबई जैसे महंगे शहर में सर्वाइव करना उनके लिए लगभग नामुमकिन हो गया था। गौरव के बैंक खाते में मात्र 84 रुपये बचे थे। यह वह दौर था जब उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वे अपने आगे का खर्च कैसे उठाएंगे और मुंबई में कैसे टिके रहेंगे।
बैंक के सामने सिर झुकाकर करते थे प्रार्थना
अपने इस बुरे दौर को याद करते हुए गौरव ने एक बेहद भावुक करने वाला किस्सा साझा किया है।
- रोजाना की प्रार्थना: गौरव ने बताया कि जब भी वे किसी बैंक के सामने से गुजरते थे, तो वे आदतन अपना सिर झुका लेते थे। वे बैंक की इमारत की तरफ देखकर ईश्वर से प्रार्थना करते थे कि हे भगवान, कुछ ऐसा चमत्कार कर दो कि मुझे काम मिल जाए और मेरा बैंक खाता भी पैसों से भर जाए। यह उनकी हताशा और अपने सपनों को पूरा करने की एक गहरी तड़प थी।
मेहनत ने बदली किस्मत
पैसों की इतनी तंगी और निराशा के बावजूद गौरव गेरा ने कभी हार नहीं मानी और वापस अपने घर लौटने का विचार नहीं किया। उनकी इसी लगन का फल उन्हें तब मिला जब उन्हें टीवी शोज मिलने शुरू हुए।
‘जस्सी जैसी कोई नहीं’ (Jassi Jaissi Koi Nahin) शो में उनके ‘नंदू’ के किरदार ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वे न सिर्फ एक सफल टीवी और फिल्म एक्टर हैं, बल्कि सोशल मीडिया की दुनिया के एक बड़े इन्फ्लुएंसर (Digital Creator) भी हैं। गौरव गेरा की यह कहानी उन हजारों युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो अक्सर शुरुआती नाकामियों के बाद हार मान लेते हैं।



