Chhattisgarh Petrol Crisis: छत्तीसगढ़ में फ्यूल का अकाल, सड़कों पर उतरी जनता

इस वक्त छत्तीसगढ़ में पेट्रोल और डीजल को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। राजधानी रायपुर से लेकर बस्तर तक की सड़कों पर अफरातफरी का माहौल है। नतीजतन प्रदेश के 300 से ज्यादा पेट्रोल पंप पूरी तरह से सूख चुके हैं और वहां सन्नाटा पसरा है। इसके अलावा जो पंप खुले हैं वहां गाड़ियों की मीलों लंबी कतारें लगी हुई हैं।
Chhattisgarh Petrol Crisis का मुख्य कारण क्या है
हाल ही में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ईंधन बचाने की एक अहम अपील की थी। इसके साथ ही उन्होंने अपने वीआईपी काफिले में गाड़ियों की संख्या भी घटा दी थी। हालांकि सरकार का यह कदम एक सकारात्मक पहल थी। लेकिन जनता ने इसे एक बड़े संकट की आहट मान लिया।
परिणामस्वरूप लोगों के बीच घबराहट फैल गई और उन्होंने पैनिक बायिंग शुरू कर दी। लोग अपनी जरूरत से कई गुना ज्यादा तेल भरवाने लगे। इस वजह से अचानक फ्यूल सप्लाई चेन पर भारी दबाव बन गया। देखते ही देखते रायपुर के सरोना, भाठागांव और देवेंद्र नगर जैसे प्रमुख इलाकों में स्टॉक पूरी तरह खत्म हो गया।
प्रशासन की सख्ती और पंपों की सघन जांच
हालात को बेकाबू होते देख प्रशासन अब पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। इसके चलते सभी जिला कलेक्टरों को जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासनिक टीमें लगातार मैदान में उतरकर निगरानी कर रही हैं।
पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अनुसार रोजाना लगभग 200 पेट्रोल पंपों की सघन जांच की जा रही है। मशीनों की सील और स्टॉक रजिस्टर बारीकी से चेक किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि नियमों को तोड़ने वालों का सीधा लाइसेंस रद्द किया जाएगा।
आम आदमी पार्टी और डीलर्स का अपना अपना तर्क
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी ने सीधा आरोप लगाया है कि कुछ डीलर्स जानबूझकर कृत्रिम संकट पैदा कर रहे हैं। इसके विपरीत पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है।
एसोसिएशन का स्पष्ट कहना है कि भुगतान प्रक्रिया में तकनीकी देरी हुई है। इसके परिणामस्वरूप सप्लाई चेन बाधित हुई और यह संकट खड़ा हुआ। फिलहाल प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और जल्द ही स्थिति के सामान्य होने का दावा कर रहा है।



