छत्तीसगढ़ कांग्रेस को मिला नया प्रभारी, क्या है गणित

कांग्रेस ने संगठन स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए झारखंड के सांसद सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ का नया प्रभारी नियुक्त किया है। Chhattisgarh Congress Incharge की जिम्मेदारी अब सचिन पायलट की जगह सुखदेव भगत संभालेंगे। पार्टी ने सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी दी है, जबकि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को असम का प्रभारी बनाया गया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के इस बदलाव के बीच दुर्ग में चल रहे तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं की मुलाकातों ने भी सियासी चर्चा को जन्म दिया। रविवार की स्थानीय रिपोर्ट 10:30 AM पर प्रकाशित हुई।
AICC की ओर से जारी संगठनात्मक नियुक्ति आदेश में छह राज्यों के प्रभारी बदले गए हैं और नई जिम्मेदारियां तत्काल प्रभाव से लागू की गई हैं। राष्ट्रीय रिपोर्टों ने भी सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़, सचिन पायलट को पंजाब और भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी मिलने की पुष्टि की है।
सुखदेव भगत के सामने संगठन की नई जिम्मेदारी
छत्तीसगढ़ कांग्रेस पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की कोशिश कर रही है। 2023 के विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद पार्टी विपक्ष में है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को राज्य की 11 सीटों में केवल एक सीट मिली थी। ऐसे में नए प्रभारी के सामने प्रदेश संगठन, जिला इकाइयों और वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल प्रमुख राजनीतिक चुनौती होगी।
प्रभारी का काम प्रदेश अध्यक्ष की जगह लेना नहीं होता। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अपनी संगठनात्मक संरचना रहती है, जबकि AICC प्रभारी केंद्रीय नेतृत्व और राज्य संगठन के बीच समन्वय का काम करता है। चुनावी रणनीति, संगठनात्मक नियुक्ति और पार्टी की प्रमुख बैठकों में प्रभारी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
दुर्ग के प्रशिक्षण शिविर ने खींचा ध्यान
दुर्ग के बालोद रोड स्थित 36 फोर्ट रिजॉर्ट में कांग्रेस का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर 5 से 7 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है। स्थानीय रिपोर्ट में बताया गया कि शिविर के दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और पूर्व मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम विधायक देवेंद्र यादव के साथ दिखाई दिए।
नेताओं का एक ही वाहन में जाना और देवेंद्र यादव के निवास पर भोजन तथा चर्चा के लिए पहुंचना स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चित रहा। हालांकि केवल नेताओं की साथ मौजूदगी को किसी नए राजनीतिक गुट के गठन का प्रमाण मान लेना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं है।
टीएस सिंहदेव ने गुटबाजी की अटकलों को नकारा
स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक टीएस सिंहदेव ने देवेंद्र यादव के साथ अपनी मुलाकात को व्यक्तिगत और पुराने पारिवारिक संबंधों से जोड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि वरिष्ठ नेता युवा कांग्रेस के चुनाव में सीधे भाग नहीं ले सकते, इसलिए इस मुलाकात को युवा कांग्रेस चुनाव की किसी रणनीति से जोड़ने का आधार नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी शिविर में पहुंचे थे लेकिन कुछ समय बाद वहां से रवाना हो गए। इसे लेकर राजनीतिक अटकलें बनीं, मगर सिंहदेव ने कहा कि कोई जरूरी काम होने के कारण उन्हें जाना पड़ा होगा। इस बयान के बाद भी किसी नाराजगी या टकराव को स्थापित तथ्य कहना उचित नहीं होगा।
नए प्रभारी की नियुक्ति से समीकरण कैसे बदलेंगे
सुखदेव भगत के छत्तीसगढ़ प्रभारी बनने के बाद प्रदेश कांग्रेस में केंद्रीय नेतृत्व के साथ संवाद का नया चैनल बनेगा। वे प्रदेश अध्यक्ष, विधायक दल, सांसदों, पूर्व मंत्रियों और संगठन पदाधिकारियों के साथ बैठकें कर सकते हैं। पार्टी की आगामी राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी भूमिका धीरे-धीरे स्पष्ट होगी।
सचिन पायलट का कार्यकाल छत्तीसगढ़ में उस दौर में रहा जब कांग्रेस 2023 की हार के बाद विपक्ष के रूप में संगठन को संभालने की कोशिश कर रही थी। अब उन्हें पंजाब भेजा जाना AICC के व्यापक फेरबदल का हिस्सा है, न कि अकेले छत्तीसगढ़ से संबंधित परिवर्तन।
भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को असम का प्रभारी बनाना भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण निर्णय है। इससे उन्हें राज्य की राजनीति के साथ राष्ट्रीय संगठनात्मक जिम्मेदारी मिली है। असम में कांग्रेस के संगठन और आगामी चुनावी तैयारियों के लिहाज से उनका अनुभव पार्टी इस्तेमाल करना चाहती है।
छत्तीसगढ़ में इसका अर्थ यह नहीं है कि बघेल प्रदेश की राजनीति से अलग हो जाएंगे। वे विधायक और राज्य के वरिष्ठ कांग्रेस नेता बने रहेंगे। AICC की राज्य प्रभारी की जिम्मेदारी एक अतिरिक्त संगठनात्मक भूमिका है।






