CG News: छत्तीसगढ़ में गन्ना किसानों का 83 करोड़ बकाया, शुगर मिलों पर लटकी तालेबंदी की तलवार

CG Sugarcane Farmers Dues:छत्तीसगढ़ के गन्ना किसानों के लिए एक बड़ी और परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है। अपना पसीना बहाकर गन्ना उगाने वाले किसान अपनी ही फसल के भुगतान के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। प्रदेश की चार प्रमुख शुगर मिलों पर किसानों का 83 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है। भारतीय किसान संघ (BKS) ने अब इस मामले में आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए मिलों के गोदामों में तालेबंदी की चेतावनी दे दी है।
5 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा गन्ने की खरीदी, भुगतान अटका
भारतीय किसान संघ के आधिकारिक आंकड़ों (22 मार्च 2026 तक) के अनुसार, किसानों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है। केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक गन्ना आपूर्ति के 15 दिनों के भीतर भुगतान अनिवार्य है, लेकिन 2 से 3 महीने बीत जाने के बाद भी किसानों के हाथ खाली हैं।
- कुल खरीदी: प्रदेश की चारों मिलों में कुल 5 लाख 32 हजार 512.06 मीट्रिक टन गन्ने की खरीदी हुई।
- कुल देय राशि: इसके एवज में किसानों को 175.22 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना था।
- भुगतान की स्थिति: अब तक केवल 91.83 करोड़ रुपये ही दिए गए हैं, जबकि 83.39 करोड़ रुपये अभी भी बकाया हैं।
किस शुगर मिल पर कितना है बकाया?
भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री नवीन शेष द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सभी प्रमुख मिलों की स्थिति चिंताजनक है:
- भोरमदेव शुगर मिल: यहां 2 लाख 55 हजार 818.87 मीट्रिक टन गन्ने की खरीदी हुई। 84.18 करोड़ में से 57.49 करोड़ का भुगतान हुआ, जबकि 26.69 करोड़ रुपये बकाया हैं।
- पंडरिया शुगर मिल: यहां की स्थिति सबसे अधिक खराब है। 40.05 करोड़ रुपये में से केवल 13.73 करोड़ का ही भुगतान हो पाया है और 26.32 करोड़ रुपये की राशि अटकी हुई है।
- केरता शुगर मिल: 38.91 करोड़ में से 16.50 करोड़ का भुगतान हुआ है और 22.41 करोड़ रुपये अभी बाकी हैं।
- करकाभाट शुगर मिल (बालोद): 12.08 करोड़ रुपये में से 4.11 करोड़ का भुगतान हुआ है और 7.97 करोड़ रुपये अब भी पेंडिंग हैं।
7 दिन का अल्टीमेटम, वरना होगी तालेबंदी
समय पर भुगतान न होने से किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। भारतीय किसान संघ ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर सभी बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो चारों शुगर मिलों के गोदामों में ताला जड़कर व्यापक आंदोलन किया जाएगा। मिल प्रबंधन फिलहाल भुगतान की स्थिति पर कोई भी स्पष्ट जवाब देने से बच रहा है।



