CG News: सुकमा के घोर नक्सल इलाके में घर पहुंची टीम, 78 वर्षीय नक्सल पीड़ित बुजुर्ग का बनाया ‘वय वंदन कार्ड’

CG News: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (Vishnu Deo Sai) की संवेदनशील पहल के तहत छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए ‘आयुष्मान भारत संतृप्ति अभियान’ चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में सुकमा (Sukma) जिले के घोर नक्सल प्रभावित विकासखंड कोंटा के ग्राम पुनपल्ली (दुब्बाटोटा) से एक बेहद प्रेरक तस्वीर सामने आई है, जहां स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर पहुंचकर एक 78 वर्षीय नक्सल पीड़ित बुजुर्ग महिला का ‘वय वंदन कार्ड’ (Vay Vandan Card) बनाया।
खबर की मुख्य बातें (Highlights)
- घर बैठे मिली सुविधा: स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 78 वर्षीय नक्सल पीड़ित वंजाम चिंगे के घर जाकर बनाया कार्ड।
- मुफ्त इलाज की गारंटी: ‘वय वंदन कार्ड’ के तहत अब बुजुर्ग महिला को मिलेगा 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज।
- संघर्ष भरा रहा जीवन: साल 2006 में नक्सल हिंसा में वंजाम चिंगे के पति की कर दी गई थी हत्या।
- स्वास्थ्य शिविर का आयोजन: गांव में लगाए गए कैंप में 4 मरीज मलेरिया पॉजिटिव मिले, 3 को किया गया रेफर।
2006 में नक्सलियों ने कर दी थी पति की हत्या
ग्राम पुनपल्ली की रहने वाली 78 वर्षीय बुजुर्ग श्रीमती वंजाम चिंगे का जीवन लंबे समय तक भारी संघर्षों से भरा रहा है। वर्ष 2006 में नक्सल हिंसा के दौरान उनके पति स्वर्गीय वंजाम देवे की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। पति की मौत के बाद से उन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों में अपना जीवन बिताया।
ऐसे संघर्षपूर्ण समय के बाद, जब प्रशासन की टीम खुद चलकर उनके घर पहुंची और स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित की, तो यह उनके लिए एक बड़ी राहत और सम्मान का क्षण था। टीम ने उनके दस्तावेजों का सत्यापन कर मौके पर ही उनका ‘वय वंदन कार्ड’ बना दिया।
5 लाख रुपये तक का मिलेगा मुफ्त इलाज
इस ‘वय वंदन कार्ड’ के बन जाने से श्रीमती वंजाम चिंगे को अब आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Yojana) के तहत बड़ी राहत मिलेगी। अब वे किसी भी शासकीय और सरकार द्वारा चिन्हित निजी अस्पतालों में प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज प्राप्त कर सकेंगी।
शिविर में मलेरिया के 4 मरीज मिले, 3 हुए रेफर
अभियान के तहत गांव में एक स्वास्थ्य शिविर का भी आयोजन किया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए और उनकी स्वास्थ्य जांच की गई।
- जांच के दौरान गांव के 4 मरीज मलेरिया पॉजिटिव (Malaria Positive) पाए गए, जिनका मेडिकल टीम ने तुरंत उपचार शुरू कर दिया।
- वहीं, गंभीर स्थिति वाले 3 अन्य मरीजों को बेहतर इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) दोरनापाल रेफर किया गया है।
अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही योजनाएं: ‘आयुष्मान भारत संतृप्ति अभियान’ का मुख्य उद्देश्य ही दूरस्थ और पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के हर पात्र व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुरक्षा पहुंचाना है। वंजाम चिंगे की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब शासन की योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तो वे केवल सुविधा नहीं देतीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और शासन व्यवस्था पर एक नए विश्वास का आधार भी बनती हैं।






