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Chhattisgarh Legal News:छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पंचायत कर्मचारियों को नहीं मिलेगी पेंशन, कोर्ट ने याचिकाएं खारिज कर कहा- ‘आप सरकारी कर्मचारी नहीं’

Chhattisgarh Legal News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने राज्य के सेवानिवृत्त पंचायत कर्मचारियों (Retired Panchayat Employees) को एक बड़ा झटका दिया है। अदालत ने पंचायतों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राज्य सरकार के कर्मचारियों की तरह पेंशन (Pension) दिए जाने की मांग से जुड़ी 20 से अधिक याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है।

जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने इस मामले में अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि पंचायत कर्मचारी ‘शासकीय कर्मचारी’ (Government Employees) की श्रेणी में नहीं आते हैं। इसलिए, उनके सेवा और सेवानिवृत्ति संबंधी मामलों पर पंचायत के अलग भर्ती एवं सेवा नियम ही लागू होते हैं।

हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए क्या कहा?(Chhattisgarh Legal News)

अदालत ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को सुनने के बाद कई महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणियां कीं:

  • कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं: कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई भी वैधानिक प्रावधान (Statutory Provision) या पेंशन योजना अदालत के सामने पेश नहीं कर सके, जिसके तहत उन्हें पेंशन पाने का कोई स्वतंत्र कानूनी अधिकार प्राप्त हो।
  • भविष्य निधि (PF) का मिला लाभ: कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति के समय लागू सेवा शर्तों में सेवानिवृत्ति लाभों के तौर पर ‘भविष्य निधि योजना’ (Provident Fund Scheme) का ही प्रावधान था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता इस बात से भी इनकार नहीं कर सके कि उन्होंने अंशदायी भविष्य निधि (Contributory PF) का लाभ लिया है।

पंचायत राज अधिनियम की ‘धारा 131’ पर कोर्ट का रुख

सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 131 का भी जिक्र किया गया। इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह धारा केवल उन वेतन, भत्ते, पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों को ‘संरक्षण’ देने की व्यवस्था करती है, जो कर्मचारी को पहले से मिल रहे हों। यह धारा किसी भी कर्मचारी के लिए ऐसा कोई नया पेंशन अधिकार पैदा नहीं करती, जो उसे उसकी मूल सेवा शर्तों के तहत पहले से प्राप्त ही नहीं था।

‘गुंडरदेही और तखतपुर में मिल रही है पेंशन’- याचिकाकर्ताओं की दलील

याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कोर्ट में दलील दी कि राज्य के कुछ अन्य जनपद पंचायतों (जैसे गुंडरदेही और तखतपुर) में कर्मचारियों को पेंशन दी जा रही है, तो उन्हें क्यों नहीं?

  • राज्य सरकार का जवाब: इस पर राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि इन जनपद पंचायतों में कुछ कर्मचारियों को जो भुगतान हो रहा है, वह स्थानीय स्तर पर गठित पेंशन निधि से किया जा रहा है, न कि किसी ‘राज्य स्तरीय वैधानिक पेंशन योजना’ के तहत। सरकार ने बताया कि इस अनियमित भुगतान को लेकर संबंधित अधिकारियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) भी जारी किए जा चुके हैं।
  • कोर्ट की टिप्पणी: इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी अन्य प्राधिकरण द्वारा गलती से या स्थानीय स्तर पर कोई भुगतान किया जा रहा है, तो उसके आधार पर सभी समान रूप से स्थित पंचायत कर्मचारियों को वैधानिक पेंशन का अधिकार नहीं मिल सकता।

10 से ज्यादा जिलों की 20 याचिकाएं एक साथ खारिज

जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायपालिका (Judiciary) का काम कानून की व्याख्या करना है। अदालत सरकार को कोई नया कानून बनाने या किसी विशेष नीति को अपनाने का निर्देश (Directives) नहीं दे सकती।

बता दें कि इस मामले में दंतेवाड़ा, बस्तर, रायगढ़, बीजापुर, मुंगेली, धमतरी, सक्ती, कांकेर, दुर्ग, सुकमा और अन्य जिलों से जुड़े कुल 20 से अधिक सेवानिवृत्त पंचायत कर्मचारियों ने अपनी याचिकाएं लगाई थीं। सभी याचिकाओं में समान कानूनी प्रश्न होने के कारण हाईकोर्ट ने उन्हें एक साथ क्लब कर सुना और अंततः खारिज कर दिया।

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