Chhattisgarh OPS: रायपुर में बिजली कर्मचारियों की महारैली, 18 नवंबर से सामूहिक अवकाश की चेतावनी

पुरानी पेंशन योजना यानी OPS को लेकर छत्तीसगढ़ में बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों का आंदोलन तेज होता दिखाई दे रहा है। मंगलवार को रायपुर में कर्मचारियों ने अपनी मांग के समर्थन में बड़ी रैली और प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरकार से पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग दोहराई है।
रायपुर में हुआ शक्ति प्रदर्शन
पुरानी पेंशन योजना को लेकर लंबे समय से अलग-अलग कर्मचारी संगठन अपनी मांग उठाते रहे हैं। इसी कड़ी में बिजली कंपनी से जुड़े अधिकारी और कर्मचारियों ने रायपुर में शक्ति प्रदर्शन किया।
कर्मचारियों का कहना है कि पुरानी पेंशन व्यवस्था सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी हुई है। उनका तर्क है कि सेवा के दौरान लंबे समय तक काम करने वाले कर्मचारियों को भविष्य के लिए निश्चित सामाजिक सुरक्षा की जरूरत होती है।
18 नवंबर से सामूहिक अवकाश की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांग पर समाधान नहीं निकला तो 18 नवंबर से सामूहिक अवकाश जैसे कदम पर विचार किया जाएगा। यह चेतावनी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बिजली कंपनी से जुड़ी सेवाएं सीधे आम लोगों से संबंधित हैं।
हालांकि सामूहिक अवकाश की स्थिति वास्तव में आती है या नहीं, यह आगे होने वाली बातचीत और सरकार के रुख पर निर्भर करेगा।
OPS की मांग क्यों उठ रही है?
पुरानी पेंशन योजना में सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन व्यवस्था अलग ढंग से काम करती है। नई पेंशन व्यवस्था में योगदान आधारित मॉडल लागू है। कर्मचारियों के एक वर्ग की चिंता यह है कि बाजार आधारित या योगदान आधारित पेंशन से भविष्य की आय को लेकर निश्चितता कम हो सकती है।
इसी कारण कई राज्यों में कर्मचारी संगठन OPS की मांग उठाते रहे हैं।
सरकार के सामने चुनौती
सरकार के सामने इस मांग का समाधान आसान नहीं है। एक तरफ कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा का सवाल है तो दूसरी तरफ पुरानी पेंशन व्यवस्था का वित्तीय प्रभाव भी महत्वपूर्ण है।
यदि सरकार किसी कर्मचारी वर्ग के लिए पुरानी पेंशन लागू करती है तो इसका दीर्घकालिक वित्तीय असर राज्य के बजट पर पड़ सकता है। इसलिए इस मुद्दे पर फैसला केवल तत्काल मांग के आधार पर नहीं बल्कि लंबे समय की वित्तीय क्षमता को देखते हुए करना होगा।
बिजली सेवाओं पर असर की आशंका
बिजली कर्मचारियों का आंदोलन अगर आगे बढ़ता है तो सबसे बड़ा सवाल सेवाओं पर संभावित प्रभाव का होगा। बिजली उत्पादन, वितरण, रखरखाव और उपभोक्ता सेवाएं लगातार चलने वाली व्यवस्थाएं हैं।
हालांकि फिलहाल प्रदर्शन और चेतावनी के स्तर पर स्थिति है। 18 नवंबर तक सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत का रास्ता खुला रह सकता है।
अब सरकार से बातचीत की उम्मीद
महारैली के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ किस स्तर पर बातचीत करती है। यदि वार्ता के जरिए कोई समाधान निकलता है तो आंदोलन आगे बढ़ने से रुक सकता है।
फिलहाल बिजली कर्मचारियों ने OPS की मांग को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है और 18 नवंबर से सामूहिक अवकाश की चेतावनी दी है। आने वाले सप्ताह इस आंदोलन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।






