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Achanakmar Tiger Reserve: मध्य प्रदेश के बाघों ने छत्तीसगढ़ में फूंक दी नई जान; ‘झुमरी’ समेत MP के बाघों से तेजी से बढ़ रहा कुनबा

कभी बाघ विहीन होने की कगार पर पहुंच चुके छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध(Achanakmar Tiger Reserve) अचानकमार टाइगर रिजर्व (Achanakmar Tiger Reserve) के लिए बेहद सुखद और राहत भरी खबर सामने आई है। पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के जंगलों से प्राकृतिक रास्तों (Natural Corridor) के जरिए आ रहे बाघों ने अचानकमार में बाघों की आबादी को नया जीवन दिया है।

मध्य प्रदेश के कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच टाइगर रिजर्व से बाघ खुद ही प्राकृतिक रूप से आवाजाही कर अचानकमार पहुंच रहे हैं और यहां अपना स्थायी ठिकाना बनाकर कुनबा बढ़ा रहे हैं। इस प्राकृतिक प्रवास (Natural Migration) की सफलता को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने मध्य प्रदेश से अतिरिक्त बाघ मांगने के अपने औपचारिक प्रस्ताव पर फिलहाल रोक लगा दी है।

खबर की मुख्य बातें (Achanakmar Tiger Reserve)

  • MP से पहुंचे बाघ: कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच से प्राकृतिक कॉरिडोर के जरिए अचानकमार पहुंचे बाघ-बाघिन।
  • झुमरी का कमाल: 400 किमी का सफर तय कर आई बाघिन ‘झुमरी’ अब तक 7 शावकों को जन्म दे चुकी है।
  • आंकड़ों में बड़ा सुधार: 2010 में जहां अचानकमार में सिर्फ 1 बाघ बचा था, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 10 के पार पहुंच गया है।
  • छत्तीसगढ़ में बढ़ा कुनबा: राज्य में 2022 के 17 बाघों के मुकाबले अप्रैल 2025 में बाघों की कुल संख्या बढ़कर 35 हुई।
  • ट्रांसलोकेशन टला: प्राकृतिक रूप से आ रहे बाघों के कारण MP से बाघ मांगने का प्रस्ताव फिलहाल रुका।

बांधवगढ़ की ‘झुमरी’ बनी स्टार, कान्हा और पेंच से भी पहुंचे बाघ

मध्य प्रदेश से पहुंचे कुल तीन बाघिनों और एक बाघ ने अचानकमार (Achanakmar Tiger Reserve) को अपना मुख्य आवास बनाया है। इनमें से कुछ प्रमुख नाम और उनकी भूमिका इस प्रकार है:

  • बाघिन ‘झुमरी’: साल 2021 में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से करीब 400 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके अचानकमार पहुंची बाघिन ‘झुमरी’ ने हाल ही में 4 नए शावकों को जन्म दिया है। झुमरी अब तक तीन बार में कुल 7 स्वस्थ शावकों को जन्म दे चुकी है।
  • बाघ ‘T-200’: साल 2023 में कान्हा टाइगर रिजर्व से अचानकमार पहुंचा और अपना इलाका कायम किया।
  • बाघिन ‘गंगा’: पेंच टाइगर रिजर्व से अचानकमार पहुंची और प्रजनन में अहम भूमिका निभा रही है।
  • बाघिन ‘आशा’: मध्य प्रदेश के जंगलों से घायल हालत में अचानकमार पहुंची थी, जिसे वन विभाग के डॉक्टरों ने ठीक किया और ‘आशा’ नाम दिया।

2010 में बचा था सिर्फ 1 बाघ, अब आंकड़ा 10 के पार

अचानकमार टाइगर रिजर्व (Achanakmar Tiger Reserve) में बाघों के संरक्षण और आबादी में जबरदस्त सुधार देखने को मिला है। जहां 2010 में यहां केवल 1 बाघ बचा था, वहीं 2014 में यह संख्या 3 और 2018 में बढ़कर 5 दर्ज की गई। वर्तमान में यहां 10 से अधिक बाघ मौजूद हैं।

पूरे प्रदेश में भी बढ़ा ग्राफ: छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड (Chhattisgarh State Wildlife Board) की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में जहां पूरे राज्य में महज 17 बाघ दर्ज किए गए थे, वहीं अप्रैल 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 35 तक पहुंच गया है।

वाइल्डलाइफ कॉरिडोर की सुरक्षा और जंगल प्रबंधन बेहद जरूरी

अचानकमार टाइगर रिजर्व (Achanakmar Tiger Reserve) की फील्ड डायरेक्टर प्रियंका पांडेय के अनुसार, मध्य प्रदेश से पहुंचे बाघ-बाघिनों ने यहां प्रजनन (Breeding) कर आबादी को दोबारा स्थापित करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वहीं, मध्य प्रदेश के पीसीसीएफ (PCCF) शुभरंजन सेन का मानना है कि जीन पूल एक्सचेंज (Gene Pool Exchange) और बाघों की आबादी को लंबी अवधि तक स्थायी बनाने के लिए दोनों राज्यों के बीच प्राकृतिक कॉरिडोर बेहद जरूरी हैं। चूंकि ये प्राकृतिक रास्ते इंसानी आबादी वाले इलाकों के करीब से गुजरते हैं, इसलिए इन कॉरिडोर में अतिक्रमण या रुकावटें बाघों के लिए खतरा बन सकती हैं। (Achanakmar Tiger Reserve0 इसके लिए दोनों राज्यों के वन विभागों को जंगलों के संयुक्त प्रबंधन और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

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