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Bastar Naxal Rehabilitation: बंदूकों से हैंडलूम तक, रायपुर में पूर्व महिला नक्सलियों ने रैंप पर बिखेरा जलवा

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में हिंसा और नक्सलवाद का रास्ता (Bastar Naxal Rehabilitation) छोड़कर मुख्यधारा में लौटी महिलाओं ने पुनर्वास और बदलाव की एक नई मिसाल कायम की है। जिन हाथों में कभी हथियार हुआ करते थे, उन्हीं हाथों ने अब आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान का धागा थाम लिया है। रायपुर के दीनदयाल उपाध्याय प्रेक्षकगृह में राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस (7 अगस्त) के अवसर पर आयोजित जनजातीय फैशन शो में इन आत्मसमर्पित महिला कैडर्स ने पारंपरिक हैंडलूम परिधान पहनकर आत्मविश्वास के साथ रैंप वॉक किया।

इस आयोजन में बस्तर की पूर्व महिला नक्सलियों ने पारंपरिक साड़ियों और आभूषणों में रैंप पर प्रस्तुति दी। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। यह आयोजन केवल कपड़ों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं था, बल्कि यह बस्तर में शांति, पुनर्वास और विकास के बदलते स्वरूप का प्रतीक बनकर उभरा।

शांति और पुनर्वास का मजबूत संदेश, Bastar Naxal Rehabilitation

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर में शांति और संभावनाओं का एक नया अध्याय शुरू हो चुका है। हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटीं बहनें अब बस्तर की कला और हैंडलूम परंपरा को देश के सामने गर्व के साथ प्रस्तुत कर रही हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि सही अवसर और मार्गदर्शन मिले तो जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव है।

ज़रूरी बात…Bastar Naxal Rehabilitation

  • रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस कार्यक्रम में आत्मसमर्पित महिला कैडर्स ने रैंप वॉक किया।
  • बस्तर की पूर्व नक्सली महिलाओं ने पारंपरिक हैंडलूम साड़ियों और आभूषणों में अपनी प्रस्तुति दी।
  • यह आयोजन बस्तर में मुख्यधारा से जुड़ने और समाज में पुनर्वास की सफलता का प्रतीक बना।
  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की।
  • बस्तर में सड़कों के विस्तार के लिए केंद्र सरकार से अरुणाचल प्रदेश की तर्ज पर नियमों में ढील देने का आग्रह किया गया।

बस्तर के विकास के लिए दिल्ली में अहम बैठक

एक तरफ जहां बस्तर में सामाजिक बदलाव की तस्वीरें सामने आ रही हैं, (Bastar Naxal Rehabilitation) वहीं दूसरी तरफ बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रयास तेज कर दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री व गृह मंत्री विजय शर्मा ने नई दिल्ली में केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि 40 से 50 वर्षों के उग्रवाद के बाद अब बस्तर में शांति का माहौल बन रहा है। ऐसे समय में क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह जोड़ने के लिए बेहतर सड़क कनेक्टिविटी सबसे पहली जरूरत है।

अरुणाचल प्रदेश मॉडल की तर्ज पर मांगी छूट, Bastar Naxal Rehabilitation

मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष प्रस्ताव रखा कि बस्तर के कई गांव घने जंगलों, पहाड़ियों और दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों में स्थित हैं। वर्तमान में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के नियमों के तहत 500 मीटर के दायरे में स्थित बसाहटों को ही एक क्लस्टर माना जाता है, जिससे बस्तर की कई छोटी और दूरस्थ बसाहटें सड़क संपर्क से वंचित रह जाती हैं।

उन्होंने आग्रह किया कि अरुणाचल प्रदेश की तर्ज पर बस्तर में भी 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाली बसाहटों (Bastar Naxal Rehabilitation) को एक क्लस्टर मानकर ऑल-वेदर सड़कों की मंजूरी दी जाए। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करने और बस्तर में बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए केंद्र की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया है।

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