Parliament Monsoon Session: हंगामे पर अपनी ही पार्टी से अलग हुए शशि थरूर! कहा- ‘संसद धरने के लिए नहीं, चर्चा के लिए है’

Parliament Monsoon Session: संसद के मॉनसून सत्र (Parliament Monsoon Session) का चौथा सप्ताह भी पिछले तीन हफ्तों की तरह भारी हंगामे के साथ शुरू हुआ है। 20 जुलाई से शुरू हुए इस सत्र में अब तक एक भी दिन शांति से कामकाज नहीं हो पाया है। सोमवार को लगातार 16वें दिन लोकसभा (Lok Sabha) में प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं चल सका। हालांकि, हंगामे के बीच सरकार ने बहुमत के आधार पर कई विधेयक पारित कर लिए हैं। इस बीच, लगातार हो रहे व्यवधान को लेकर खुद कांग्रेस के भीतर से विरोध के स्वर उठने लगे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने विपक्ष के रवैये पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खबर की मुख्य बातें (Highlights)
- संसद में हंगामा जारी: लगातार 16वें दिन लोकसभा में हंगामे के कारण प्रश्नकाल और शून्यकाल बाधित।
- थरूर की नसीहत: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा- संसद विरोध प्रदर्शन या धरने की जगह नहीं है।
- प्रियंका गांधी का स्टैंड: प्रियंका गांधी ने साफ किया- जब तक गृह मंत्री अमित शाह का बयान नहीं आता, गतिरोध जारी रहेगा।
- क्या विपक्ष का हो रहा नुकसान?: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हंगामे से विपक्ष खुद अपना नुकसान कर रहा है।
शशि थरूर ने विपक्ष के रवैये पर उठाए गंभीर सवाल
इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टु यूनाइटेड नेशन्स (IIMUN) के एक कार्यक्रम में शिरकत करते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपनी ही पार्टी और विपक्ष की रणनीति पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
थरूर ने कहा, “विरोध प्रदर्शन और धरना करने के लिए लोकतंत्र में अलग जगहें तय हैं, लेकिन संसद का उद्देश्य कुछ और है। सदन लोकतंत्र का मंदिर है और यहां पर चर्चा और बहस होना बहुत जरूरी है।” उन्होंने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि अगर सरकार से कोई असहमति है तो उस पर प्रश्न किए जाने चाहिए और तर्क-वितर्क होना चाहिए, ताकि वह संसद के वैधानिक रिकॉर्ड (Legal Record) में दर्ज हो सके। थरूर ने याद दिलाया कि बहुमत वाली सरकार बिना विपक्ष के समर्थन के भी बिल पास कर सकती है, इसलिए विपक्ष के लिए भी संसद का सुचारु रूप से चलना जरूरी है।
‘गृह मंत्री के बयान तक जारी रहेगा गतिरोध’- प्रियंका गांधी
जहां एक तरफ शशि थरूर संसद में चर्चा की वकालत कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) ने सत्र के चौथे सप्ताह से पहले ही विपक्ष का एजेंडा स्पष्ट कर दिया था। प्रियंका ने साफ तौर पर कहा कि जब तक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) संसद में आकर बयान नहीं देंगे, तब तक विपक्ष का यह गतिरोध बरकरार रहेगा।
क्या-क्या हुए मुद्दे? सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (SP) समेत अन्य विपक्षी दल अयोध्या के राम मंदिर निर्माण में कथित चंदा चोरी और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के मुद्दे को लेकर जोरदार हंगामा करने लगे। विपक्ष की मांग है कि इन मुद्दों पर गृह मंत्री सदन में जवाब दें। भारी हंगामे के कारण पीठासीन सभापतियों को कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी और अंततः दिन भर के लिए सदन को स्थगित कर दिया गया।
क्या अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार रहा है विपक्ष?
राजनीतिक विश्लेषकों (Political Analysts) का मानना है कि अगर विपक्ष इसी तरह पूरे मॉनसून सत्र में हंगामा करता रहा, तो इससे उसे बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। जानकारों के मुताबिक, जब सदन में किसी मुद्दे पर तार्किक चर्चा होती है, तो उसका संदेश सीधे जनता के बीच जाता है और विपक्ष मजबूत नजर आता है। लेकिन लगातार हंगामा करने और सदन की कार्यवाही बाधित करने से जनता में यह संदेश जा सकता है कि विपक्ष अपनी बात को मजबूती से और तर्कों के साथ रखने में सक्षम नहीं है।






