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Chhattisgarh No Confidence Motion: 17 जुलाई को सबसे बड़ा मुकाबला

रायपुर/जनदखल। Chhattisgarh No Confidence Motion को लेकर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार, 14 जुलाई को विपक्षी दल कांग्रेस ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने प्रस्ताव पर सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार, 17 जुलाई को चर्चा कराने की घोषणा की। इसके साथ ही 5 दिवसीय सत्र का सबसे बड़ा राजनीतिक मुकाबला अब अंतिम दिन के लिए तय हो गया है।

कांग्रेस विधायक दल की बैठक में बनी थी रणनीति

अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला सत्र शुरू होने से 1 दिन पहले रविवार को नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के निवास पर हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में लिया गया था। बैठक के बाद महंत ने कहा था कि कांग्रेस इस सरकार में अविश्वास रखती है, इसके वादे झूठे हैं और सरकार में भ्रष्टाचार है। उन्होंने बिजली, महंगाई, किसानों की समस्याओं, कानून-व्यवस्था और नकटी गांव बेदखली को प्रमुख मुद्दा बताया था।

इन मुद्दों पर सरकार को घेरेगा विपक्ष

चर्चा के दौरान कांग्रेस जिन विषयों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है, उनमें प्रमुख हैं:

  • नवा रायपुर के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और उससे जुड़ा विवाद
  • प्रदेश की कानून-व्यवस्था और अपराध के मामले
  • बिजली दरों में बढ़ोतरी और महंगाई
  • किसानों से जुड़ी समस्याएं और खाद की उपलब्धता

संख्या बल सरकार के पक्ष में

90 सदस्यीय छत्तीसगढ़ विधानसभा में भाजपा सरकार के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए अविश्वास प्रस्ताव के पारित होने की संभावना नहीं मानी जा रही है। इसके बावजूद कांग्रेस इस प्रस्ताव को सरकार की नीतियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के राजनीतिक अवसर के रूप में देख रही है। चर्चा के दौरान दोनों पक्षों के प्रमुख नेताओं के बीच लंबी बहस होने के आसार हैं।

हंगामे के बीच पेश हुआ प्रस्ताव

जिस दिन अविश्वास प्रस्ताव पेश हुआ, उसी दिन सदन में नकटी गांव और कानून-व्यवस्था पर कांग्रेस का स्थगन प्रस्ताव खारिज होने से भारी हंगामा भी हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गर्भगृह में नारेबाजी करने पर कांग्रेस विधायक नियमानुसार स्वतः निलंबित हुए। इससे पहले सत्र के पहले दिन राम मंदिर चंदा मामले पर भी दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हो चुकी है।

आगे क्या होगा

अब सबकी नजर 17 जुलाई पर है। उस दिन नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत की अगुवाई में विपक्ष अपने आरोप रखेगा और सरकार की ओर से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जवाब देंगे। चर्चा के बाद प्रस्ताव पर मतदान की स्थिति बनी तो संख्या बल के आधार पर परिणाम सरकार के पक्ष में रहने की संभावना है।

एक नजर में:

  • मुख्य बिंदु: साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश, चर्चा 17 जुलाई को
  • प्रस्ताव पेश होने की तारीख: मंगलवार, 14 जुलाई 2026
  • स्थान: छत्तीसगढ़ विधानसभा, रायपुर
  • संबंधित पक्ष: कांग्रेस (विपक्ष) बनाम भाजपा सरकार
  • प्रमुख तथ्य: 90 सदस्यीय विधानसभा, सरकार के पास स्पष्ट बहुमत
  • अगला आधिकारिक कदम: 17 जुलाई को सदन में चर्चा

अविश्वास प्रस्ताव भले ही संख्या बल के आधार पर सरकार के लिए खतरा न हो, लेकिन 17 जुलाई की चर्चा विपक्ष के लिए नकटी, बिजली और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को सार्वजनिक रूप से जवाबदेह बनाने का सबसे बड़ा मंच होगी। इस दिन की बहस आने वाले महीनों की प्रदेश की राजनीति की दिशा भी तय कर सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: छत्तीसगढ़ में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा कब होगी?

उत्तर: विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की घोषणा के अनुसार अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा मानसून सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 को होगी।

प्रश्न 2: कांग्रेस किन मुद्दों पर सरकार को घेरना चाहती है?

उत्तर: नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत के अनुसार कांग्रेस बिजली, महंगाई, किसानों की समस्याओं, कानून-व्यवस्था और नकटी गांव बेदखली जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेगी।

प्रश्न 3: क्या अविश्वास प्रस्ताव से सरकार गिर सकती है?

उत्तर: 90 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए प्रस्ताव पारित होने की संभावना नहीं मानी जा रही है। विपक्ष इसे राजनीतिक संदेश देने के अवसर के रूप में देख रहा है।

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