CG Education Department: नई पदस्थापना पर जॉइन नहीं करने वाले 273 शिक्षकों का वेतन रुका, 38 अधिकारियों को नोटिस

रायपुर। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में स्कूलों के युक्तियुक्तकरण (Rationalization) के बाद नई पदस्थापना वाले विद्यालयों में समय-सीमा के भीतर कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले शिक्षकों के खिलाफ शिक्षा विभाग (Education Department) ने सख्त रवैया अपना लिया है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने कड़ा एक्शन लेते हुए ऐसे 273 से अधिक शिक्षकों का वेतन रोक दिया है। इसके साथ ही, इस पूरे मामले में घोर लापरवाही बरतने पर विभाग ने 5 संभागीय संयुक्त संचालकों (JD) और 33 जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
अधिकारियों की लापरवाही पर विभाग सख्त
डीपीआई ने स्पष्ट किया है कि कई बार निर्देश दिए जाने के बावजूद अधिकारियों ने अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित शिक्षकों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई नहीं की।
- जिम्मेदारी में शिथिलता: अधिकारियों ने संचालनालय को न तो कोई तथ्यात्मक जानकारी दी और न ही आवश्यक दस्तावेज भेजे। विभाग ने इसे कर्तव्यों के निर्वहन में भारी लापरवाही माना है।
- नोटिस और अल्टीमेटम: संचालनालय ने पूछा है कि इस लापरवाही के लिए अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए? डीपीआई ने तीन दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट और एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। तय समय में जवाब न मिलने पर मामला सीधे शासन को भेजा जाएगा।
सबसे ज्यादा 134 प्राथमिक शिक्षक अनुपस्थित
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, युक्तियुक्तकरण के बावजूद प्रदेश भर में 273 से अधिक शिक्षक और अधिकारी अब तक अपनी नई पदस्थापना पर जॉइन नहीं हुए हैं। इनमें शामिल हैं:
- प्राथमिक शिक्षक: 134
- व्याख्याता: 71
- शिक्षक (वर्ग-2): 42
- प्रधान पाठक: 15
- प्राचार्य: 1
विभाग का मानना है कि शिक्षकों के इस रवैये से युक्तियुक्तकरण की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के प्रयासों को बड़ा झटका लग रहा है।
क्या है युक्तियुक्तकरण का मुख्य उद्देश्य?
राज्य सरकार ने ग्रामीण और दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों के शिक्षकविहीन स्कूलों की समस्या को दूर करने के लिए प्रदेश के 10,538 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया है।
- छात्रों की पढ़ाई पर असर: इस विशाल प्रक्रिया के तहत 16,165 शिक्षकों का समायोजन किया गया है। विभाग का स्पष्ट कहना है कि नई जगह पदस्थापना के बाद भी शिक्षकों द्वारा कार्यभार न संभालना सीधे तौर पर विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर नकारात्मक असर डाल रहा है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



