RBI Inflation Forecast: आम जनता को झटका, आरबीआई ने बढ़ाया महंगाई का अनुमान, अब 5.1% रह सकती है दर

RBI Inflation Forecast:भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की समीक्षा बैठक के नतीजों के बाद आम जनता के बजट को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई (Retail Inflation) के अपने पिछले अनुमान को संशोधित करते हुए बढ़ा दिया है। आरबीआई के नए अनुमानों के मुताबिक, देश में महंगाई की दर अब 5.1 प्रतिशत (5.1%) रहने की आशंका है, जिससे आने वाले दिनों में रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
महंगाई का अनुमान बढ़ाने के पीछे आरबीआई के तर्क
रिजर्व बैंक के गवर्नर ने मौद्रिक नीति के फैसलों की घोषणा करते हुए साफ किया कि वैश्विक और घरेलू स्तर पर कुछ ऐसे कारक सक्रिय हैं, जिनकी वजह से कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।
- सब्जियों और खाद्य पदार्थों की कीमतें: मुख्य रूप से सब्जियों, दालों और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में हो रही अनपेक्षित बढ़ोतरी ने केंद्रीय बैंक को अपना अनुमान बदलने पर मजबूर किया है।
- मौसम का मिजाज: देश के कुछ हिस्सों में मौसम की बेरुखी और अल-नीनो के संभावित असर के कारण फसलों के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है, जो महंगाई को बढ़ावा दे सकती है।
- कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और अन्य कमोडिटीज की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ाने का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
रेपो रेट और नीतिगत रुख पर असर
महंगाई के इस बढ़ते दबाव को देखते हुए आरबीआई ने अपनी ब्याज दरों को लेकर भी सतर्क रुख अपनाया है।
- रेपो रेट में बदलाव नहीं: रिजर्व बैंक ने फिलहाल रेपो रेट (Repo Rate) को पुरानी दरों पर ही स्थिर रखने का फैसला किया है, ताकि आर्थिक विकास की रफ्तार को भी सहारा मिलता रहे।
- सख्त निगरानी: हालांकि, केंद्रीय बैंक ने साफ कर दिया है कि उसका मुख्य ध्यान महंगाई को नियंत्रित कर 4 प्रतिशत के आदर्श लक्ष्य के दायरे में लाना है। जब तक महंगाई पूरी तरह काबू में नहीं आती, तब तक नीतिगत दरों में किसी बड़ी कटौती की उम्मीद बेहद कम है।
इस फैसले के बाद होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) कम होने का इंतजार कर रहे मध्यमवर्गीय परिवारों को अभी कुछ समय और राहत के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।



