Chhattisgarh NewsExclusive

Raipur Uzbekistan Women Case: हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, जानें पूरा मामला

क्या विदेशी नागरिकों को बिना किसी औपचारिक गिरफ्तारी के हफ्तों तक हिरासत में रखा जा सकता है। यह सवाल तब खड़ा हुआ जब छत्तीसगढ़ की राजधानी से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई। दरअसल अवैध रूप से भारत में रह रही उज्बेकिस्तान की दो युवतियों की हिरासत के मामले में अब छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाई कोर्ट में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। इस मामले ने पुलिस और खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Raipur Uzbekistan Women Case में कोर्ट ने सरकारों को अपना जवाब पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। इसके अलावा याचिकाकर्ता युवतियों को भी अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है।

रायपुर के तेलीबांधा में हुई थी कार्रवाई

राजधानी रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र से इस पूरे विवाद की शुरुआत हुई थी। पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली थी कि इलाके के एक होटल में उज्बेकिस्तान की दो युवतियां अवैध रूप से निवास कर रही हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने फरवरी 2026 में दोनों को हिरासत में ले लिया था। चूंकि मामला विदेशी नागरिकों की सुरक्षा और देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा था, परिणामस्वरूप इसकी जांच को आगे इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी आईबी को सौंप दिया गया। हालांकि इस सामान्य सी दिखने वाली कार्रवाई ने तब एक नया मोड़ ले लिया जब युवतियों की ओर से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।

  • पुलिस ने तेलीबांधा क्षेत्र के एक होटल में छापेमारी की थी
  • मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आईबी को जांच सौंपी गई
  • फरवरी 2026 में विदेशी युवतियों को हिरासत में लिया गया था

कानूनी प्रक्रिया के उल्लंघन पर उठे गंभीर सवाल

हिरासत में ली गई युवतियों ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर पुलिस पर गैरकानूनी हिरासत का आरोप लगाया है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि उन्हें 14 जनवरी 2026 से ही लगातार हिरासत में रखा गया है जो पूरी तरह से अवैध है। उनका कहना है कि उन्हें बिना किसी औपचारिक गिरफ्तारी के सीधे रायपुर सेंट्रल जेल के डिटेंशन सेंटर में भेज दिया गया।

  • युवतियों को किसी भी मजिस्ट्रेट या न्यायिक अधिकारी के सामने पेश नहीं किया गया
  • गिरफ्तारी के समय कोई स्पष्ट एफआईआर दर्ज नहीं थी
  • दोनों युवतियां टूरिस्ट वीजा पर भारत आई थीं और उनके पास वैध पासपोर्ट था

दरअसल वकीलों का तर्क है कि वीजा का समाप्त होना महज़ एक तकनीकी त्रुटि है। इसके आधार पर बिना अदालत में पेश किए लंबे समय तक किसी को भी हिरासत में रखना संविधान और आपराधिक न्याय व्यवस्था के मूल नियमों का सीधा उल्लंघन है। राज्य और केंद्र सरकार के अधिवक्ताओं ने जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से समय मांगा है जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकारें इस मामले में क्या कानूनी आधार पेश करती हैं।

Related Articles

Back to top button